फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, 565 गिरफ्तार; पुलिस पर पेट्रोल बम से हमला

पेरिस। France Protest News: फ्रांस में बढ़ती महंगाई, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के विरोध में शनिवार को हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए। राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) फेंका, जिसमें कई अधिकारी झुलस गए। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में हुई कार्रवाई के दौरान कुल 565 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पेरिस में हुई हिंसा में चार पुलिस अधिकारी और एक जेंडरम (सशस्त्र पुलिसकर्मी) घायल हुए। इनमें से तीन अधिकारी ज्वलनशील उपकरणों की चपेट में आने से झुलस गए। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि देशभर में करीब 150 विरोध रैलियां आयोजित की गई थीं, जिनमें से अधिकांश शांतिपूर्ण रहीं। हालांकि, उन्होंने कुछ समूहों की ओर से प्रदर्शन समाप्त होने के दौरान की गई हिंसक गतिविधियों की कड़ी आलोचना की और इसे असाधारण स्तर की हिंसा बताया।
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फ्रांस में 3.20 लाख लोगों ने किया प्रदर्शन
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार शनिवार को पूरे फ्रांस में लगभग 3,20,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इससे पहले सप्ताहांत में प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 4,10,000 थी। राजधानी पेरिस में लगभग 70,000 लोग विरोध मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन की शुरुआत पोर्ते डी बैग्नोलेट से हुई और मार्च पोर्ते डी चैरेंटन की दिशा में आगे बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से शहर के केंद्रीय हिस्सों से दूरी बनाए रखी। एएफपी के मुताबिक मार्च अपने अंतिम पड़ाव के करीब पहुंचने तक काफी हद तक शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके बाद काले कपड़े पहने और चेहरे ढके हुए दर्जनों लोगों ने हिंसा शुरू कर दी। इन लोगों ने हथौड़ों की मदद से सड़क के पत्थर उखाड़े और उन्हें पुलिसकर्मियों की ओर फेंका। सुरक्षाबलों पर एक ज्वलनशील वस्तु भी फेंकी गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पेरिस पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सैकड़ों उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर वस्तुएं फेंककर हमला किया।
70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद भड़की हिंसा
प्रदर्शनों को देखते हुए फ्रांस सरकार ने पहले ही बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए थे। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने देशभर में 70,000 पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का ऐलान किया था। इस व्यवस्था में विशेष सुरक्षा इकाइयों को भी शामिल किया गया था। नुनेज ने पहले ही चेतावनी दी थी कि शनिवार को हिंसा की आशंका अधिक है। पुलिस अधिकारी पर मोलोटोव कॉकटेल से हुए हमले को उन्होंने हत्या की कोशिश करार दिया।
महंगाई और सरकारी सेवाओं के खिलाफ एकजुट हुए प्रदर्शनकारी
फ्रांस में हुए इन विरोध प्रदर्शनों में स्कूली छात्र, ट्रेड यूनियन और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग एक साथ नजर आए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक असमानता को कम करना और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति में सुधार करना थीं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार की नीतियों पर भी नाराजगी जाहिर की। कुछ लोगों ने हैलोवीन की पोशाकें पहनकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उनके हाथों में सरकार के खिलाफ नारे लिखे पोस्टर और तख्तियां थीं।
ल्योन और टूलूज में भी पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
फ्रांस की राजधानी के अलावा ल्योन और टूलूज़ में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला। ल्योन में कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर वस्तुएं फेंकीं, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, टूलूज़ में बिना अनुमति आयोजित एक प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। छात्र संगठनों ने आगे भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। उनकी योजना मंगलवार और गुरुवार को हाई स्कूलों तथा विश्वविद्यालयों में और अधिक बंदी या ब्लॉकेड करने की है। इसके बाद 5 नवंबर को मजदूरों और ट्रेड यूनियनों की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में भी छात्र शामिल होंगे।
जर्मनी में भी युवाओं का प्रदर्शन हिंसक, पुलिस ने चलाया वॉटर कैनन
फ्रांस के अलावा जर्मनी में भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं। यहां 'Gen Z regelt!' समूह के नेतृत्व में कई शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। इन आंदोलनों में युवाओं ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रभावी कदम और जीवनयापन की बढ़ती लागत को कम करने जैसी मांगें उठाईं। शुरुआत में रैलियां काफी हद तक शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन शाम होते-होते कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गईं। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया। फ्रांस और जर्मनी में हुई इन घटनाओं से यूरोप में महंगाई, जीवनयापन की लागत और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर बढ़ती नाराजगी सामने आई है।




















