नेशनल डेस्क। राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी में उस समय हड़कंप मच गया, जब उद्घाटन से ठीक पहले अचानक आग लग गई। इस परियोजना का उद्घाटन अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले थे। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की करीब 20 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, हालांकि समय रहते राहत कार्य शुरू होने से बड़े नुकसान को टालने की कोशिश की गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग रिफाइनरी के 'क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट' में लगी।
यह अत्याधुनिक रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की सहयोगी इकाई HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा विकसित की गई है। खास बात यह है कि यह देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जहां रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का संयुक्त विकास किया गया है। यहां बीएस-6 मानक का ईंधन तैयार किया जाना है, जो पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा स्वच्छ माना जाता है। इस परियोजना को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का प्रतीक भी माना जा रहा है।
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करीब 79,450 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस मेगा परियोजना में HPCL की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि राजस्थान सरकार की भागीदारी 26 प्रतिशत है। यह संयुक्त उपक्रम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री की जनसभा भी प्रस्तावित है, जिसे लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं।
90 लाख टन सालाना क्षमता वाली यह रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली है। इसकी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 24 लाख टन प्रति वर्ष है और इसका नेल्सन जटिलता सूचकांक 17.0 है, जो इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोरसायन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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इस रिफाइनरी का भूमिपूजन सबसे पहले 22 सितंबर, 2013 को सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान किया था। इसकी शुरुआती अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। PM मोदी ने 16 जनवरी, 2018 को इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया और इसकी लागत को संशोधित करके 43,129 करोड़ रुपए हो गई थी।