भोपाल। संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक गिरने को लेकर महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शोभा ओझा ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के माध्यम से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश रची थी, विपक्षी एकजुटता ने उसे विफल कर दिया है, लिहाजा कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली इस जीत का स्वागत करती है।
संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर हुए मतदान ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 मत पड़े, जबकि विरोध में 230 मत पड़े। जिसके फलस्वरुप यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो पाया।
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शोभा ओझा ने कहा कि यहां कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि कांग्रेस के साथ ही समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में 100 प्रतिशत एकजुट है। हमने सितंबर 2023 में "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" का समर्थन किया था और आज भी हमारी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक़ तुरंत मिलना चाहिए।
ओझा ने कहा कि महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का यह रुख कोई नया नहीं है, महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का मूल हिस्सा रहा है। वर्ष 1989 में ही तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा, इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। इसके बाद वर्ष -2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया। आज देश भर में जो लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं तो यह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है।
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने कहा कि विपक्ष ने इसलिए महिला आरक्षण बिल का विरोध किया क्योंकि उन्हें आशंका थी कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव में भाजपा और सहयोगी दलों का इसको फायदा मिलेगा और कांग्रेस के समर्थक दलों की सरकार गिर जाएगी। इसलिए इस बिल को विपक्ष ने गिराने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि आने वाले चुनावों में हमारी बहने एमपी, एमएलए बनेंगी, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा में प्रतिनिधित्व करेंगी, लेकिन कांग्रेस की घटिया मानसिकता से सिद्ध हुआ कि वे महिला हितैषी नहीं हैं।उनको अंदाज था कि बिल पास होता तो महिलाओं का समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा दिखता। कांग्रेस और सहयोगी दलों को चेतावनी देना चाहते हैं कि आपको महिलाओं का श्राप लगेगा, आप कभी सत्ता में नहीं बैठ पाओगे।