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अजब फरमान :लिव-इन में रह रहे युवक-युवती के घर वालों पर 21 लाख रुपए का फाइन!

लिव-इन में रहने की सजा एक युगल के परिजनों को दी जा रही है। राजस्थान के जालोर की एक पंचायत ने लिव-इन में रहने वाले युवक-युवती के परिजनों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही उन परिवारों का समाज से बहिष्कार भी कर दिया है।
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लिव-इन में रह रहे युवक-युवती के घर वालों पर 21 लाख रुपए का फाइन!
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नेशनल डेस्क। राजस्थान के जालोर जिले से एक पंचायत के कथित तुगलकी फरमान का मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। आरोप है कि समाज के कुछ पंचों ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युवक और युवती के परिवारों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। इतना ही नहीं, दोनों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने, हुक्का-पानी बंद करने और उन्हें धार्मिक स्थलों व सामाजिक आयोजनों में शामिल होने से रोकने का भी फैसला सुनाया गया। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।

तलाक के बाद युवक के साथ रहने लगी थी युवती 

यह मामला जालोर जिले के सायला पंचायत क्षेत्र का है। पीड़ित परिवार के अनुसार, युवती का बचपन में विवाह हुआ था, लेकिन बालिग होने के बाद वर्ष 2024 में उसका तलाक हो गया। इसके बाद वह अपने पति से अलग रहने लगी। परिवार का कहना है कि 1 नवंबर 2025 से युवती अपनी इच्छा से समाज के ही 22 वर्षीय युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। दोनों बालिग हैं और अपनी सहमति से साथ रह रहे हैं, लेकिन इसी बात को लेकर समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई।

पंचायत की बैठकों में बनाया गया दबाव 

परिवार का आरोप है कि फरवरी 2026 में समाज के धर्मस्थल पर पंचायत की बैठक बुलाई गई, जिसमें दोनों परिवारों को उपस्थित होने के लिए कहा गया। बैठक में पंचों ने युवक और युवती को अलग करने का दबाव बनाया और युवती को उसके मायके भेजने के लिए दो महीने का समय दिया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने यह शर्त स्वीकार नहीं की, जिसके बाद पंचायत ने दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय लिया।

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61 लोगों की मौजूदगी में लगाया गया जुर्माना 

पीड़ित परिवार के मुताबिक, 20 अप्रैल 2026 को एक पंच के घर दूसरी बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 61 लोग मौजूद थे। आरोप है कि बैठक में शामिल 11 पंचों ने दोनों परिवारों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया। साथ ही सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करते हुए परिवारों से सभी सामाजिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया। शिकायत में लतीफ खां, नैने खां, मटार खां, जुसे खां समेत 11 लोगों को नामजद किया गया है।

समाज के लोगों ने बातचीत की बंद 

पीड़ित परिवार का कहना है कि पंचायत के फैसले के बाद समाज के लोगों ने उनसे बातचीत बंद कर दी। उन्हें धार्मिक स्थलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में शामिल होने से रोक दिया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि 6 जून को एक रिश्तेदार की मृत्यु के बाद आयोजित बारहवें कार्यक्रम में भी उन्हें शामिल नहीं होने दिया गया और वहां से बाहर निकाल दिया गया। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों से उनके सामाजिक और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

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पुलिस से लगाई न्याय की गुहार 

परिवार ने बताया कि उन्होंने 1 जून को सायला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 29 जून को पीड़ित पक्ष जालोर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत ने सामाजिक दबाव बनाकर परिवारों को प्रताड़ित किया और उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया।

जालोर पुलिस ने शुरू की जांच  

जालोर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक ने जांच की जिम्मेदारी अधिकारी महीपाल सिंह को सौंपी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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