CJP Protest:जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का 12वां दिन, एक छात्र की बिगड़ी तबियत

नई दिल्ली। सोनम वांगचुक ने बताया कि उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है, हालांकि उन्हें थकान महसूस हो रही है और डॉक्टरों ने पानी, नमक का सेवन बढ़ाने की सलाह दी है। दूसरी ओर, लंबे समय से अनशन कर रहे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर अड़े हुए हैं। इस बीच, आंदोलन के आयोजकों ने सरकार पर छात्रों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
12वें दिन भी जारी रहा आंदोलन
जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन बुधवार को लगातार 12वें दिन भी जारी रहा। यह प्रदर्शन NEET सहित अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू किया गया था। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने शेयर की स्वास्थ्य जानकारी
भूख हड़ताल के चौथे दिन सोनम वांगचुक ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से कम पाया गया है, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अधिक पानी और नमक लेने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर 66 है, जो कई दिनों से खाना ना खाने की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें थकान महसूस हो रही है।
एक छात्र की बिगड़ी तबियत
सोनम वांगचुक ने बताया कि लंबे समय तक उपवास रहने पर शरीर ऊर्जा के लिए फैट का उपयोग करने लगता है और अधिक समय तक यही स्थिति बनी रहने पर मांसपेशियों और अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि अब तक उनका करीब दो किलोग्राम वजन कम हुआ है और प्रतिदिन लगभग 650 ग्राम वजन घटना सामान्य प्रक्रिया है। इस बीच, आठ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की बात कही है।
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सरकार से जवाबदेही की मांग तेज
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल परीक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भी है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आए पेपर लीक, छात्रों के टूटते सपने और आत्महत्या जैसी घटनाओं ने इस आंदोलन को जन्म दिया है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई।












