नकली दूध-पनीर का सफेद धंधा:गायत्री फूड्स डायरेक्टर की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, ईडी की गिरफ्त में ही रहेगा किशन मोदी

योगेश सोनी, जबलपुर। भोपाल की मेसर्स जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर किशन मोदी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। नकली दूध, पनीर और डेयरी प्रोडक्ट्स के जरिए करोड़ों रुपए के कथित काले कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की वेकेशन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग कोई साधारण अपराध नहीं है। इसका सीधा असर देश की वित्तीय व्यवस्था और संप्रभुता पर पड़ता है। कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।
डेयरी उत्पाद तैयार करती है कंपनी
दरअसल भोपाल स्थित गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ‘मिल्क मैजिक’ ब्रांड के नाम से डेयरी उत्पाद तैयार करती है। आरोप है कि कंपनी के एमडी किशन मोदी ने दूध से प्राकृतिक फैट निकालकर उसकी जगह पाम ऑयल और अन्य केमिकल्स मिलाकर नकली डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार किए। इन उत्पादों की सप्लाई देश के साथ-साथ विदेशों में भी की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया कि कंपनी ने मिलावटी उत्पाद बेचकर करीब 20 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। इसी मामले में ईडी ने 13 मार्च 2026 को किशन मोदी को गिरफ्तार किया था। जमानत याचिका पर ईडी की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पक्ष रखा।
रात के अंधेरे में बनता था नकली घी-पनीर
ईडी जांच में कंपनी के प्लांट के भीतर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक प्लांट में 5 से 6 लाख किलोग्राम तक पाम ऑयल खरीदा गया। पूछताछ में पता चला कि रात के समय केमिकल और पाम ऑयल से भरे टैंकर प्लांट में पहुंचते थे जहां मक्खन, पनीर और मिल्क क्रीम जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार किए जाते थे।
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फर्जी लैब रिपोर्ट के सहारे विदेशों तक पहुंचा माल
जांच में यह भी सामने आया कि मिलावटी उत्पादों को असली साबित करने के लिए फर्जी और हेरफेर की गई लैब रिपोर्ट तैयार कराई गईं। इन कथित फर्जी रिपोर्ट्स के आधार पर करीब 90 लाख रुपए के डेयरी प्रोडक्ट्स अलग-अलग देशों में एक्सपोर्ट किए गए। जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे देश की साख को भी नुकसान पहुंचा।
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‘मुझे कुछ नहीं पता था’ वाली दलील नहीं मानी
किशन मोदी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि मुख्य गड़बड़ी कंपनी के पूर्व CEO सुनील त्रिपाठी ने की थी और उन्होंने खुद इस मामले में पहले FIR दर्ज कराई थी। बचाव पक्ष ने दावा किया कि किशन मोदी खुद पीड़ित हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जिस स्तर पर प्लांट में केमिकल मिक्सिंग, पाम ऑयल की खरीदी और फर्जी इनवॉइस का काम चल रहा था उसमें कंपनी के डायरेक्टर की जानकारी न होना संभव नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका गंभीर नजर आती है।












