इंदौर। धार के बहुचर्चित भोजशाला मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर हुई सुनवाई में एएसआई ने अपनी 98 दिन की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अदालत के सामने महत्वपूर्ण दावे और साक्ष्य पेश किए।
प्राचीन वस्तुएं मिलीं
सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने अदालत को बताया कि सर्वे में मिले साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि वर्तमान संरचना पहले एक मंदिर थी, जिसे बाद में तोड़कर मस्जिद के रूप में परिवर्तित किया गया। उन्होंने कहा कि मौके से प्राचीन शिलालेख, मूर्तियां, तांबे के सिक्के और अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं मिली हैं, जो इस दावे को मजबूत करती हैं।
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मंदिर को क्षतिग्रस्त किया
एएसआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ शिलालेखों में मुगल आक्रमण के बाद मंदिर को क्षतिग्रस्त किए जाने और उसी सामग्री से नई संरचना बनाए जाने के संकेत मिलते हैं। यह निष्कर्ष 10 खंडों में तैयार 2189 पन्नों की रिपोर्ट पर आधारित हैं, जिसमें पूरे स्थल का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है।
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राजा भोज के काल का स्मारक
अदालत को यह भी बताया गया कि विवादित स्मारक 10वीं से 11वीं शताब्दी का है और इसे राजा भोज के काल का माना जा रहा है। दलीलों में कहा गया कि यह स्थान मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। हिंदू पक्ष का कहना है कि एएसआई की रिपोर्ट से उनके पुराने दावों को और मजबूती मिली है।
सात विशेषज्ञों ने किया सर्वे
एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले सीमित स्तर पर केवल तीन अधिकारियों द्वारा सर्वे किया गया था। लेकिन इस बार 22 अप्रैल 2024 से 98 दिनों तक सात विशेषज्ञ अधिकारियों, पुरातत्वविदों और तकनीकी टीम द्वारा पूरे संरक्षित स्मारक का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे किया गया। यह सर्वे दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुबह से शाम तक किया गया और खुदाई इस तरह की गई कि मूल संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे। पूरी प्रक्रिया के फोटो खींचे गए और वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई, जिसकी सामग्री संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
धार्मिक प्रतीक मिले
सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से मिले तांबे के सिक्कों, शेर मुख, कीर्ति मुख और ‘ॐ नमः शिवाय’ जैसे प्रतीकों वाले शिलालेखों का भी उल्लेख किया गया। मामले में अब अगली सुनवाई में बहस जारी रहेगी। 6 मई 2026 को एएसआई की ओर से सलेक चंद जैन के साथ अधिवक्ता दिनेश राजभर और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे। हाईकोर्ट फिलहाल प्रस्तुत साक्ष्यों और रिपोर्ट का गहराई से परीक्षण कर रहा है।