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भोपाल:राजधानी में घरेलू हिंसा के बढ़ रहे मामले, हर दिन औसतन 5 महिलाएं हो रहीं शिकार

राजधानी भोपाल में महिलाएं अपने ही घर में मिले दर्द से जूझ रही हैं। यह खुलासा महिला थाने और मध्यस्थता केंद्र के आंकड़े कर रहे हैं। इनके अनुसार राजधानी में औसतन हर रोज चार महिलाएं और बच्चियां घरेलू हिंसा का सामना करती हैं। तीन साल के आंकड़े देखें तो इसका ग्राफ तेजी से ऊपर जाता नजर आ रहा है।
राजधानी में घरेलू हिंसा के बढ़ रहे मामले, हर दिन औसतन 5 महिलाएं हो रहीं शिकार
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पल्लवी वाघेला, भोपाल। कुछ मामलों में तो लंबे समय तक प्रताड़ना सहन करने के बाद महिलाएं आवाज उठाती हैं। इनमें ज्यादातर मामले शादी के बाद के हैं, वहीं कुछ मामलों में आपसी तालमेल न बैठ पाने के कारण भी शिकायतें थाने तक पहुंचती हैं। लगातार बढ़ते आंकड़े घरेलू हिंसा की गंभीरता को दर्शाते हैं। जागरूकता और आत्मनिर्भरता के चलते अब महिलाएं खुलकर सामने आ रही हैं।

लगातार बढ़ रहे मामले 

आंकड़ों को देखें तो महिला थाने में साल 2024 में 763 मामले दर्ज हुए थे। वहीं, 2025 में यह बढ़कर 1764 हो गए। वहीं, इस साल की बात करें तो शुरुआती तीन महीने में आंकड़ों की संख्या साढ़े चार सौ के करीब है। यानी औसत 5 मामले हर रोज घरेलू हिंसा के थाने में पहुंच रहे हैं। यह बढ़ोतरी लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन मामलों में महिलाओं और बच्चियों की संख्या भी कम नहीं है। यह स्थिति सामाजिक ढांचे पर भी सवाल खड़े करती है।

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घरेलू हिंसा के हैरान कर देने वाले आंकड़े

2024 में 763 मामले 2025 में 1764 मामले और इस साल यानि 2026 मार्च तक 453 केस सामने आए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बीते वर्षों में मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। हर साल के मुकाबले मामलों की संख्या दोगुनी के करीब पहुंच रही है। शुरुआती महीनों के आंकड़े भी इस साल बड़े उछाल की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि यही रफ्तार बनी रही तो साल के आखिर तक संख्या और अधिक बढ़ सकती है। यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए चुनौती बनती जा रही है।

पुलिस निकाल रही समाधान 

थाने के जरिए पहुंचने वाले मामलों में सबसे अधिक घरेलू हिंसा के मामले होते हैं। इन मामलों में हमारा सबसे पहला प्रयास यह होता है कि पति और ससुराल पक्ष को समझाकर परिवार को टूटने से बचाया जाए। यदि बात नहीं बनती तो पुलिस आवश्यक कार्रवाई करती है। गौरवी सेंटर की को-ऑर्डिनेटर शिवानी सैनी ने बताया कि कई मामलों में बातचीत से समाधान भी निकलता है। लेकिन गंभीर मामलों में सख्त कदम उठाना जरूरी हो जाता है। पुलिस और मध्यस्थता केंद्र मिलकर समाधान निकालने की कोशिश करते हैं।

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पीड़ितों ने बयां किया दर्द

अब घरेलू हिंसा या किसी भी तरह की प्रताड़ना के केस दर्ज होने लगे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण महिलाओं में आई जागरुकता है। इसके अलावा आत्मनिर्भर होने के चलते भी अब महिलाएं प्रताड़ना सहने की बजाए आवाज उठाने लगी हैं। संगिनी संस्था की प्रार्थना मिश्रा ने बताया कि महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है। अब महिलाएं अन्याय के खिलाफ खुलकर सामने आ रही हैं। बागसेवनिया से आई महिला ने शिकायत में कहा कि उसकी शादी को 7 साल हो चुके हैं और दो बेटियां है। पति उसे बेटियों को जन्म देने और मोटी होने को लेकर ताने कसता है और मारता-पीटता भी है। महिला के मुताबिक बेटियों की वजह से वह प्रताड़ना सह रही थी, लेकिन अब पति बेटियों को भी मारता है तो उससे सहन नहीं हो रहा। मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा गया है। रातीबड़ निवासी 31 वर्षीय युवती की शादी 2018 में दिल्ली के कारोबारी से हुई भी। पिता अधिकारी पद से रिटायर्ड हैं। शादी के बाद पति, सास और ननद ने दहेज के नाम पर मारपीट और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। पुलिस ने आरोपी पति, सास और ननद के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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