NHAI टोल के फर्जीवाड़े पर ED की रेड! 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर छापे, करोड़ों की धांधली की जांच तेज

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच अब और तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को सात राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई करते हुए 14 ठिकानों पर तलाशी शुरू की। एजेंसी की टीम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और कोलकाता में संदिग्ध परिसरों की जांच कर रही है। यह मामला कथित तौर पर ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिससे टोल की रसीदें तैयार की जाती थीं और वसूली गई रकम का कुछ हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखने का आरोप है। ED अब पैसों के पूरे लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
सात राज्यों में एक साथ पहुंची ED की टीमें
ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की अगुवाई में यह तलाशी अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत चलाया गया। एजेंसी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक पहुंची है। कुल 14 ठिकानों पर दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसी का फोकस उन लोगों और परिसरों पर है, जिनका कथित तौर पर टोल वसूली से जुड़े नेटवर्क से संबंध है। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी के दौरान मिले रिकॉर्ड आगे की जांच में अहम हो सकते हैं।
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फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल वसूली का आरोप
इस मामले में आरोप है कि कुछ लोगों ने NHAI के आधिकारिक सिस्टम के समान एक अनधिकृत सॉफ्टवेयर तैयार किया। इसका इस्तेमाल कथित तौर पर टोल रसीदें बनाने और वसूली का हिसाब बदलने के लिए किया गया। आरोप यह भी है कि टोल से आने वाली रकम का एक हिस्सा NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज नहीं किया गया। जांच एजेंसियों को शक है कि इसी तरीके से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया और रकम को दूसरे रास्तों से आगे भेजा गया।
फोरेंसिक जांच में भी मिले संकेत
ED के अनुसार, फोरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े संकेत मिले हैं। अब एजेंसी डिजिटल डाटा, कंप्यूटर रिकॉर्ड, बैंक खातों और दूसरे दस्तावेजों की जांच कर रही है। ED यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर हासिल की गई रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची। जांच में टोल संचालकों, IT से जुड़े लोगों और दूसरे संदिग्धों के बीच पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
फर्जी FASTag का भी कनेक्शन
जांच में फर्जी FASTag के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। आरोप है कि इसके जरिए कुछ ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को नियमों से अलग तरीके से टोल पार कराया जाता था। इस मामले की जांच में यूपी STF की कार्रवाई भी अहम रही है। वाराणसी से आलोक सिंह की गिरफ्तारी का भी इस नेटवर्क से संबंध बताया गया है। उस पर हरहुआ से कथित अवैध नेटवर्क चलाने का आरोप है।
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200 से ज्यादा टोल प्लाजा जांच के दायरे में
इस मामले की जांच का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है। देशभर में 200 से ज्यादा टोल प्लाजा की जांच की जानकारी सामने आई है, जिनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश में बताए जा रहे हैं। अब ED की नजर कथित फर्जीवाड़े से हुई कमाई के पूरे नेटवर्क पर है। ताजा छापेमारी के दौरान जुटाए जा रहे सबूतों से यह साफ हो सकता है कि इस मामले में कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।



















