नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के ट्रंप, नॉर्वे पर निशाना - बोले 8 बार हकदार था, भारत-पाक युद्ध रोककर बचाई 5 करोड़ जान

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे की आलोचना की क्योंकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि जिन युद्धों को उन्होंने सुलझाया, उनके लिए वे आठ बार इस सम्मान के हकदार थे। सिरैक्यूज में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोककर 5 करोड़ (50 मिलियन) लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका को, जिसका प्रतिनिधित्व मैं आपके राष्ट्रपति के तौर पर कर रहा हूं, नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला।
नॉर्वे के निर्णय को धब्बा बताया
यह नॉर्वे देश और उन लोगों पर एक कभी न मिटने वाला दाग है जिन्होंने इतना शर्मनाक और अपमानजनक फैसला लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- नोबेल शांति पुरस्कार को कुछ कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों ने हमेशा के लिए बदनाम कर दिया है। वे लोकतंत्र के विरोधी और असल में सभ्यता के दुश्मन हैं। नॉर्वे, हम यह नहीं भूलेंगे कि तुमने यह पुरस्कार नहीं दिया। इसके बाद ट्रंप ने उन संघर्षों का जिक्र किया जिन्हें सुलझाने का उन्होंने दावा किया था। उन्होंने कहा कि वे दो और मामलों को खत्म करने पर काम कर रहे हैं - ईरान का मामला और रूस-यूक्रेन युद्ध।
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नॉर्वे ने जो किया भूलेंगे नहीं
ट्रंप ने कहा- नॉर्वे, हम यह नहीं भूलेंगे कि तुमने यह पुरस्कार नहीं दिया। इतिहास में हमारा रिकॉर्ड सबसे शानदार रहा है- आठ युद्ध, हर युद्ध के लिए हमें 8 नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए थे। लेकिन, तुमने संयुक्त राज्य अमेरिका को शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया। ट्रंप ने कहा- इसके अलावा, मैंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने और पूरे मध्य पूर्व (Middle East) को उड़ाने से रोका। मैंने इतिहास में किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा लोगों की जान बचाई।
इस साल के नोबेल भारतवंशी को
नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीकी मूल की UN की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै को दिया गया, जिनके बारे में ट्रंप ने कहा कि उनके बारे में किसी ने कभी सुना ही नहीं। ट्रंप ने कहा, आज संयुक्त राष्ट्र में काम करने वाली एक लिबरल महिला को नोबेल पुरस्कार दिया गया, जिनके बारे में किसी ने कभी सुना तक नहीं है, लेकिन फिर भी बधाई। 85 साल की पिल्लै दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं कानून विशेषज्ञ और UN की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके काम के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला। उन्होंने 2003 से 2008 तक इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की जज के तौर पर काम किया और बाद में UN के एक आयोग की अध्यक्षता की, जिसने यह निष्कर्ष निकाला कि इज़राइल ने गाजा में नरसंहार किया था। इजराइल ने इस निष्कर्ष को सख्ती से खारिज कर दिया था।
चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को मिल चुका है पुरस्कार
चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। यह हैं थियोडोर रूजवेल्ट, वुड्रो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा। ओबामा को यह पुरस्कार 2009 में मिला, जब उनके कार्यकाल का पहला साल था। ट्रंप ने बार-बार ओबामा के इस पुरस्कार को लेकर आलोचना की है और कहा है कि उन्हें बिना कुछ किए ही पुरस्कार मिल गया।
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर प्रतिबंध लगा दिए। यह कदम कोर्ट की पूर्व जज नवी पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ ही घंटों बाद उठाया गया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद ICC को अमेरिकी नागरिकों पर मुकदमा चलाने से रोकना था। यह कदम हेग स्थित कोर्ट के खिलाफ प्रशासन के अभियान में और तेजी को दर्शाता है।




















