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भारत में ठगी, दुबई से कंट्रोल !साइबर फ्रॉड के बड़े खिलाड़ी को पुलिस ने दबोचा

डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और ऑनलाइन टास्क के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दुबई से शुरू होकर थाईलैंड तक फैले इस नेटवर्क का खुलासा कैसे हुआ और आरोपी लोगों को कैसे फंसाता था, जानिए पूरी कहानी।
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साइबर फ्रॉड के बड़े खिलाड़ी को पुलिस ने दबोचा
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देश में साइबर अपराध लगातार नई-नई शक्लें ले रहा है। कभी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराया जाता है तो कभी निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर बैंक खाते खाली कर दिए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में तेजी आई है और हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं। अब एक ऐसे ही बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसका संचालन भारत से नहीं बल्कि दुबई और बाद में थाईलैंड से किया जा रहा था। पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और इंटरपोल की मदद से उस शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोपी की पहचान गणेश बाळासो काले उर्फ सौरभ के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि वह देशभर में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क को विदेश में बैठकर नियंत्रित कर रहा था और उसके जरिए करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी।

एक छोटे केस से खुला अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क

पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत देहूरोड में दर्ज एक ऑनलाइन टास्क फ्रॉड शिकायत से हुई थी। शुरुआत में यह एक सामान्य साइबर ठगी का मामला लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। साइबर पुलिस को मिले डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल ने जांचकर्ताओं को एक बड़े नेटवर्क तक पहुंचा दिया। जांच के दौरान बार-बार एक ही नाम सामने आ रहा था और वह था गणेश बाळासो काले। इसके बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों और संपर्कों की गहन जांच शुरू की। जून 2024 में इसी मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जांच एजेंसियों को लगातार महसूस हो रहा था कि इसके पीछे कोई बड़ा संचालक मौजूद है। बाद में जांच का पूरा फोकस गणेश काले पर आ गया।

दुबई में बनाया था साइबर ठगी का कंट्रोल रूम

पुलिस जांच में सामने आया कि गणेश काले दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वहां उसने एक अलग कार्यालय बना रखा था, जहां से साइबर फ्रॉड की गतिविधियों को संचालित किया जाता था। आरोपी और उसके सहयोगी लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। कई मामलों में लोगों को ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले कमाई का झांसा दिया जाता था। कुछ मामलों में निवेश पर कई गुना रिटर्न का वादा किया जाता था, जबकि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर उनसे पैसे वसूले जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी लोगों के बैंक खातों, एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल कर लेता था। इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता था।

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चीन समेत कई विदेशी कनेक्शन आए सामने

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को इस नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन के भी सबूत मिलने लगे। अधिकारियों के अनुसार आरोपी के संपर्क कई विदेशी नागरिकों से थे और कुछ मामलों में चीन से जुड़े लिंक भी सामने आए हैं। यही वजह थी कि मामले को केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए आगे बढ़ाया गया। पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और अलग-अलग जगहों से साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा था।

दुबई से भागकर थाईलैंड पहुंचा आरोपी

जब जांच एजेंसियां आरोपी के करीब पहुंचने लगीं तो उसने अपना ठिकाना बदल लिया। पुलिस के अनुसार सितंबर 2025 में गणेश काले दुबई छोड़कर थाईलैंड चला गया। हालांकि आरोपी लगातार लोकेशन बदलकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। पुलिस ने इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। आखिरकार आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश तेज कर दी गई।

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बैंकॉक एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी, मुंबई लाकर किया अरेस्ट

कई महीनों की कोशिशों के बाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली। गणेश काले को बैंकॉक एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाया गया। 11 जून को जैसे ही आरोपी मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा, वहां पहले से मौजूद साइबर पुलिस टीम ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया।

करोड़ों की ठगी के मामलों में सामने आया नाम

पुलिस का दावा है कि गणेश काले का संबंध कई हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी मामलों से है। जांच में हिंजवडी के 18 लाख रुपये की ठगी के मामले में उसकी भूमिका सामने आई है। इसके अलावा 2 करोड़ 66 लाख रुपये के एक बड़े साइबर फ्रॉड केस में भी उसका नाम सामने आया है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान और भी कई मामलों का खुलासा हो सकता है। जांच एजेंसियां अब केवल आरोपी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं।

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पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े राज

साइबर पुलिस का मानना है कि गणेश काले से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां उसके विदेशी संपर्कों, बैंकिंग नेटवर्क और तकनीकी सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ के जरिए देशभर में हुए कई बड़े साइबर अपराधों की कड़ियां जुड़ सकती हैं। साथ ही उन लोगों तक भी पहुंचा जा सकता है, जो विदेशों में बैठकर भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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