दिल्ली के साकेत में 5 मंजिला बिल्डिंग गिरी :एक मौत, 12 लोगों का रेस्क्यू, बचाव टीम अब भी मौजूद

दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, रविवार सुबह तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और व्यक्ति फंसा न हो।
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एक मौत, 12 लोगों का रेस्क्यू, बचाव टीम अब भी मौजूद

दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जहां 5 मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और दिल्ली फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

12 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, रविवार सुबह तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और व्यक्ति फंसा न हो। फिलहाल बिल्डिंग गिरने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और मामले की जांच की जा रही है।

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स्थानीय लोगों ने की मदद

दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार रात इमारत गिरने के बाद कुछ मिनटों तक चारों तरफ सिर्फ धूल, चीखें और अफरा-तफरी का माहौल था। जोरदार धमाके की आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर निकल आए, लेकिन धूल के घने गुबार के बीच किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। जैसे ही हालात थोड़े साफ हुए, आसपास के लोगों ने देखा कि एक इमारत ढह चुकी है और कई लोग उसके मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।

हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले मदद के लिए स्थानीय लोग ही आगे आए। कई युवक बिना अपनी जान की परवाह किए मलबे की ओर दौड़ पड़े। उस समय तक न पुलिस पहुंची थी और न ही दमकल विभाग की टीम। तभी मलबे के भीतर से दबे लोगों की आवाजें सुनाई देने लगीं। कोई मदद के लिए पुकार रहा था, तो कोई दर्द से कराह रहा था। इन आवाजों ने वहां मौजूद लोगों को रुकने नहीं दिया।

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हादसे की तस्वीरें

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हादसे में घायल को बाहर ले जाते स्थानीय लोग

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NDRF और पुलिस की टीमों ने संभाला मोर्चा

हाथों से ईंटें हटाकर लोगों ने बचाईं जानें

किसी ने अपने हाथों से ईंटें हटाना शुरू किया, तो कोई लोहे की सरियों को खींचकर रास्ता बनाने लगा। आसपास की दुकानों और घरों से फावड़े, लोहे की रॉड और टॉर्च तक जुटा ली गईं। स्थानीय निवासी जगदीश बताते हैं कि उस वक्त किसी को अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं थी, सबका ध्यान सिर्फ मलबे में फंसे लोगों को बचाने पर था।

कई लोगों ने मलबे में रहकर जीती जंग

इसी दौरान कुछ लोगों ने मलबे के अंदर से आवाज देकर अपनी मौजूदगी का संकेत दिया। स्थानीय लोगों ने तेजी दिखाई और राहत एजेंसियों के पहुंचने से पहले ही तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर आने के बाद घायल दर्द से कराह रहे थे, लेकिन जिंदा बच जाने की राहत उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी।

इलाका बना सहारा, कोई पानी लाया तो कोई एंबुलेंस बुलाने में जुटा

हादसे के बाद इलाके में इंसानियत की अनोखी तस्वीर देखने को मिली। कोई घायलों के लिए पानी लेकर दौड़ा, किसी ने एंबुलेंस को फोन किया, तो कुछ लोग रास्ता खाली करवाने और भीड़ संभालने में जुट गए। स्थानीय निवासी भीम बताते हैं कि उस समय वहां हर व्यक्ति एक-दूसरे का सहारा बन गया था।

कोई मलबे में दबे लोगों को लगातार आवाज देकर हिम्मत बंधा रहा था—“हिम्मत मत हारो, हम निकाल रहे हैं।” बाद में पुलिस, दमकल और राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान संभाला, लेकिन शुरुआती मिनटों में स्थानीय लोगों की बहादुरी और इंसानियत ने कई जिंदगियों को उम्मीद दी।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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