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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला : सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार; पत्नी को मिलने की मिली अनुमति

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। कोर्ट ने सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती सोनम वांगचुक को प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। बीते तीन हफ्ते से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहेंगे। 
सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार; पत्नी को मिलने की मिली अनुमति
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग स्वीकार नहीं की है। अदालत ने किसी भी तरह का अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। साथ ही निर्देश दिया कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और उनके साथ मौजूद लोगों के लिए अलग विश्राम कक्ष उपलब्ध कराया जाए तथा उन्हें वांगचुक से मिलने की अनुमति दी जाए।

रिहाई और निजी अस्पताल में इलाज की मांग

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वांगचुक की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें रिहा किया जाए और अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि मेदांता अस्पताल से बातचीत हो चुकी है और वांगचुक को अपने वकील तथा निजी डॉक्टर से मिलने की अनुमति भी नहीं मिल रही है।

सरकार बोली- सरकारी डॉक्टरों की निगरानी में सुरक्षित हैं

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि 16 जुलाई के आदेश के अनुसार सरकारी चिकित्सकों की निगरानी में नियमित इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सभी आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप किए जा रहे हैं और आवश्यकता हुई तो वांगचुक को एम्स भी शिफ्ट किया जा सकता है।

18 दिन के उपवास से स्वास्थ्य पर असर

सरकार की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि वांगचुक डायबिटीज के मरीज नहीं हैं, लेकिन 18 दिन के उपवास के कारण उनकी किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है। उन्हें बिना शुगर वाले इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं ताकि स्वास्थ्य को स्थिर रखा जा सके।

एम्स के डॉक्टर ने बताई स्वास्थ्य की स्थिति

एम्स के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अक्षय ने अदालत को बताया कि वांगचुक का शुगर और पोटेशियम स्तर काफी कम है। उन्हें कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम और विटामिन की जरूरत है। डॉक्टरों ने नसों के जरिए (IV) विटामिन देने की सलाह दी थी, लेकिन वांगचुक ने इसके लिए सहमति नहीं दी। मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

'अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज का अधिकार'

कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, इसलिए एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकारी डॉक्टरों पर अविश्वास नहीं है, लेकिन मरीज की इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने पूछा- सरकारी डॉक्टरों पर भरोसा क्यों नहीं?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल किया कि जब सरकारी डॉक्टर इलाज कर रहे हैं तो उन पर अविश्वास की वजह क्या है। इस पर सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनका सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं है, बल्कि वांगचुक केवल अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहते हैं। सरकार ने जवाब दिया कि मरीज की सुरक्षा और इलाज सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है और इसमें कोई कमी नहीं बरती जा रही।

पत्नी ने लगाया 'अवैध हिरासत' का आरोप

याचिकाकर्ता गीतांजलि आंग्मो का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन उन्हें वांगचुक को डिस्चार्ज कराने या निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दे रहा। उन्होंने अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी का भी जिक्र करते हुए इसे चिकित्सकीय देखभाल के बजाय 'अवैध हिरासत' जैसा बताया। हालांकि सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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