प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का दौरा किया और बाद में इसके उद्घाटन की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। सहारनपुर के गणेशपुर पहुंचने पर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर देखते ही भीड़ ने भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगाए। पीएम मोदी ने गाड़ी से बाहर आकर लोगों का अभिवादन भी किया।
गणेशपुर हेलीपैड पर स्वागत के बाद प्रधानमंत्री का काफिला एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड सेक्शन तक पहुंचा। यहां उन्होंने ग्रीनफील्ड हाईवे और वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर की जानकारी ली। पीएम ने राजाजी टाइगर नेशनल पार्क क्षेत्र से गुजरने वाले इस कॉरिडोर का निरीक्षण किया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
इसके बाद प्रधानमंत्री मां डाट काली मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 10 मिनट पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे देहरादून में आयोजित जनसभा के लिए रवाना हुए।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे करीब 210 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे लगभग 11,970 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी और समय दोनों में बड़ी कमी आएगी। अब यह सफर लगभग 6 घंटे की बजाय ढाई से तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जिसे एशिया का सबसे लंबा माना जा रहा है। यह कॉरिडोर राजाजी टाइगर नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है, जिससे वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही सुरक्षित रहती है। नीचे से हाथी, बाघ और तेंदुआ जैसे जानवर बिना किसी बाधा के आ-जा सकते हैं।
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ कनेक्टिविटी का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। पूरे मार्ग पर हरियाली, सोलर लाइट और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। साथ ही सुरक्षा के लिए ड्रोन उड़ाने पर रोक भी लगाई गई है।
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दिल्ली-उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे तीनों राज्यों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे न सिर्फ यात्रा आसान होगी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। देहरादून, मसूरी और चारधाम यात्रा तक पहुंच और अधिक सुगम हो जाएगी। इसके अलावा यह कई राष्ट्रीय राजमार्गों और स्टेट हाईवे से भी सीधा जुड़ता है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को आधुनिक भारत की इंजीनियरिंग और योजना का शानदार उदाहरण माना जा रहा है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई है। यह परियोजना उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को एक नई दिशा देने की क्षमता रखती है।