दो बच्चों की शर्त पर मोहन सरकार का ब्रेक!CM मोहन यादव के फैसले से खुलेंगे सरकारी नौकरी के रास्ते

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी से जुड़ी दो बच्चों की अधिकतम सीमा वाले विवादित प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद अब दो से अधिक संतान वाले अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा से बाहर रखने का प्रस्तावित नियम हटाया जाएगा। इससे नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं और कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
CM मोहन यादव के फैसले से खुलेंगे सरकारी नौकरी के रास्ते

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी सेवा में दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़े प्रस्तावित नियम को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने विवादित मसौदे को वापस लेने और पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि अब नियमों का नया संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा। इस फैसले के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने के आधार पर किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने की आशंका खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री के इस कदम को युवाओं और कर्मचारी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बदला फैसला

सरकारी सेवा नियमों के नए मसौदे में दो से अधिक जीवित संतान वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र मानने का प्रावधान शामिल किया गया था। यह मसौदा सामने आने के बाद कई स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई थी। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं हस्तक्षेप किया और संबंधित विभाग को इस प्रावधान को हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का ऐसा प्रारूप लागू नहीं किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर असर पड़े।

2001 से लागू थी दो बच्चों की व्यवस्था

मध्य प्रदेश में वर्ष 2001 में जनसंख्या नियंत्रण नीति के तहत एक व्यवस्था लागू की गई थी। इसके अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोगों को सरकारी सेवा में सीधी भर्ती और कुछ नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। यह नियम लंबे समय से लागू था और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पात्रता तय करने का आधार भी बनता रहा।

ये भी पढ़ें: MP Pharma Sector: पीथमपुर में बनेगी हेलियन की पहली यूनिट, 2000 करोड़ निवेश से मिलेगा बड़ा रोजगार

कर्मचारियों पर भी पड़ता था असर

यह व्यवस्था केवल नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं थी। मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत दो से अधिक बच्चों को कई मामलों में सेवा संबंधी नियमों से भी जोड़ा गया था। इसी वजह से यह विषय लंबे समय से चर्चा और बहस का हिस्सा बना हुआ था। कई कर्मचारी संगठनों और युवाओं ने समय-समय पर इस नियम की समीक्षा की मांग भी उठाई थी।

नया मसौदा होगा तैयार

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग अब नियमों का नया प्रारूप तैयार करेगा। इसमें उन सभी प्रस्तावों को हटाया जाएगा जिनमें दो से अधिक जीवित संतान होने के आधार पर सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने की बात कही गई थी। विभाग नए संशोधित मसौदे को तैयार कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फिर से प्रकाशित करेगा।

युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे कई युवाओं के बीच इस प्रस्ताव को लेकर चिंता थी। उन्हें आशंका थी कि यदि यह नियम लागू होता है तो पात्रता को लेकर नई बाधाएं खड़ी हो सकती हैं। अब सरकार के फैसले के बाद यह स्थिति साफ हो गई है कि केवल दो बच्चों की सीमा के आधार पर किसी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।

ये भी पढ़ें: जबलपुर : अब स्वाद के साथ थाली में सजेंगे पोषक तत्वों से भरपूर 'काले आलू', कैंसर, शुगर और हार्ट की बीमारियों का जोखिम कम करेगी

दूसरे राज्यों में भी हट चुकी है पाबंदी

देश के कई राज्यों ने पहले ही इस तरह की शर्तों में बदलाव किया है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसी राज्य सरकारें वर्षों पहले ऐसे प्रतिबंध हटा चुकी हैं। इसके बाद वहां सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों पर किसी प्रकार की अतिरिक्त रोक नहीं रही। मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

Latest Posts