भोपाल। मध्यप्रदेश के वन क्षेत्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम ने एक बड़े खतरे को समय रहते टाल दिया। पिछले दो से ढाई महीने से आबादी के आसपास घूम रहे एक रेडियो कॉलर युक्त नर नर बाघ को आखिरकार सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद सावधानी और रणनीति के साथ अंजाम दिया गया, ताकि न तो स्थानीय लोगों को कोई नुकसान हो और न ही बाघ को किसी तरह की चोट पहुंचे। खास बात यह रही कि यह अभियान लगातार तीन दिनों तक चला और इसमें आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक तरीकों का भी सहारा लिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाघ को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और फिर उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया।
बताया गया है कि यह बाघ पिछले कुछ महीनों से लगातार आबादी के नजदीक देखा जा रहा था। इससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया था और किसी अप्रिय घटना की आशंका भी बढ़ गई थी। वन विभाग की टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। रेडियो कॉलर लगे होने के कारण उसकी लोकेशन ट्रैक करना संभव हो पा रहा था, लेकिन उसे सुरक्षित पकड़ना आसान नहीं था।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम ने लगातार तीन दिन तक कड़ी मेहनत की। ऑपरेशन में तकनीकी ट्रैकिंग का सहारा लिया गया, जिससे बाघ की सटीक लोकेशन का पता चलता रहा। इसके साथ ही पांच हाथियों को भी अभियान में शामिल किया गया, जिनकी मदद से घने जंगल और कठिन इलाकों में बाघ को घेरने में सहायता मिली। मैदानी टीमों ने भी पूरी मुस्तैदी के साथ काम किया और सभी ने मिलकर इस चुनौतीपूर्ण अभियान को सफल बनाया।
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इस ऑपरेशन में कई विशेषज्ञों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और नर्मदापुरम वनमंडल की टीम के साथ-साथ वन्यजीव विशेषज्ञों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। डॉ. गुरुदत्त शर्मा, डॉ. प्रशांत देशमुख और डॉ. हमजा फारूकी जैसे विशेषज्ञों ने अपनी विशेषज्ञता के जरिए बाघ को सुरक्षित काबू में करने में मदद की।उनके अनुभव और सही रणनीति के कारण यह अभियान बिना किसी बड़ी समस्या के पूरा हो सका।
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसमें कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा और न ही बाघ को किसी तरह की चोट आई। अधिकारियों के अनुसार पूरे अभियान को बेहद सावधानी से प्लान किया गया था, ताकि हर स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
रेस्क्यू के बाद बाघ का पूरा मेडिकल चेकअप किया गया। विशेषज्ञों ने उसकी स्थिति को सामान्य पाया, जिसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि बाघ अपने प्राकृतिक वातावरण में वापस लौट सके और सामान्य जीवन जी सके।