तेल वाले रास्ते पर जंग :केशम द्वीप बना नया युद्ध का मैदान, बंदरगाह बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब उस जगह तक पहुंच गया है, जिसे दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन माना जाता है। स्टेट ऑफ होर्मुज अब सीधे जंग की चपेट में आ चुका है। ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम केशम द्वीप पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यह वही इलाका है, जहां से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान कथित तौर पर नियंत्रण रखता है और कई मामलों में टोल वसूली भी करता है। सैटेलाइट तस्वीरों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हालांकि ईरान और अमेरिका दोनों के दावों में बड़ा अंतर सामने आ रहा है, जिससे स्थिति और उलझ गई है।
‘टोल रूट’ बना जंग का नया केंद्र
स्टेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है। इसी मार्ग से खाड़ी देशों का तेल दुनियाभर में भेजा जाता है। ईरान इस जलमार्ग पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए केशम द्वीप और लरक द्वीप के बीच के रास्ते को नियंत्रित करता है। बताया जाता है कि इस रूट से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी अनुमति लेनी होती है और कुछ मामलों में भारी टोल भी चुकाना पड़ता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को ‘टोल बूथ’ के रूप में भी देखा जाने लगा है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी तबाही
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय सैटेलाइट सिस्टम की तस्वीरों में केशम द्वीप के बंदरगाह क्षेत्र से धुआं उठता हुआ दिखाई दिया है। तस्वीरों के विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि हमले में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। बहमन कमर्शियल पोर्ट और मछली पकड़ने वाले घाट के कुछ हिस्से प्रभावित हुए हैं। यह हमले 1 अप्रैल की शाम से 2 अप्रैल की दोपहर के बीच किए गए बताए जा रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
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ईरान का दावा vs अमेरिका की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि उसने केशम द्वीप के ऊपर दुश्मन के एक फाइटर जेट को मार गिराया है। इसके समर्थन में ईरानी मीडिया ने एक वीडियो भी जारी किया है। वहीं अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनका कोई भी विमान इस हमले में क्षतिग्रस्त नहीं हुआ और ईरान के दावे भ्रामक हैं। इस तरह के विरोधाभासी बयानों ने जंग की स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
क्यों अहम है केशम द्वीप?
केशम द्वीप सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि ईरान की समुद्री रणनीति का अहम केंद्र है। करीब 558 वर्ग मील में फैला यह इलाका न केवल व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि यहां भूमिगत सैन्य ढांचे भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस द्वीप का इस्तेमाल समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के लिए किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों पर उठे सवाल
ईरान के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि जिस बंदरगाह को निशाना बनाया गया, वह पूरी तरह व्यावसायिक था। उनका आरोप है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर अमेरिका का रुख आक्रामक बना हुआ है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि अगर ईरान झुकता नहीं है, तो आगे और बड़े हमले हो सकते हैं।












