नेशनल डेस्क। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने की सिफारिश के बाद पार्टी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने पहले एक वीडियो पोस्ट किया और फिर शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा कि उन्हें 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।' उनके इस संदेश को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अप्रत्यक्ष नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और जो भी नेता पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने वीडियो जारी कर कहा कि पार्टी के नेता निडर होकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आपका एक वीडियो आया है…जब देश के तमाम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव आता है आप साइन नहीं करते… मोदी के खिलाफ आप आवाज नहीं निकालते हो।' संजय सिंह ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई, जनहित के मुद्दे और विपक्ष के वॉकआउट जैसे मामलों में एकजुटता जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर जवाब जनता चाहती है और पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं और यह कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा, 'पार्टी का संसदीय बोर्ड का नेता बदलता रहता है. मैं भी जब संसद में था तब भी कुछ बदलाव किए गए थे और ये बदलाव होते रहते हैं।' मान ने कहा कि संसद में कई मुद्दों पर विपक्ष को एकजुट होकर रणनीति बनानी पड़ती है और पार्टी के निर्देशों के अनुसार ही सांसदों को अपनी भूमिका निभानी होती है।
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भगवंत मान ने यह भी कहा कि जब विपक्ष किसी मुद्दे पर वॉकआउट करता है या चर्चा की मांग करता है तो सांसदों को पार्टी की रणनीति के अनुसार चलना होता है। उन्होंने कहा, 'जब संसद में वॉकआउट करना होता है या किसी मुद्दे पर चर्चा करवानी होती है तो पार्टी लाइन के मुताबिक ही मुद्दों पर बात होती है। लेकिन जब कोई सांसद ऐसा नहीं करता है तो ये पार्टी लाइन या व्हिप का उल्लंघन होता है। इसलिए उसके बाद कार्रवाई की जाती है।' उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के गंभीर मुद्दों की बजाय हल्के मुद्दे उठाना नेतृत्व को स्वीकार्य नहीं है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'हम सबको लोगों के मुद्दे उठाने थे सरकार की आंखों में आंख डालकर…' उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, 'कोई सॉफ्ट पीआर अपनी संसद में करें… कोई समोसे की बात उठा रहा है तो उससे जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दे की बात उठाई जाए।' भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावों में मतदाता सूची से नाम काटे जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी पर्याप्त आवाज नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा, 'सभी विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव करने के लिए प्रस्ताव लाना चाहा आपने उसको साइन करने से मना कर दिया…ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी।'
पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर आवाज नहीं उठाई। ढांडा ने कहा, 'पिछले कुछ सालों से, तुम खुद डरे हुए हो। तुम मोदी के खिलाफ बोलने में हिचकिचाते हो. तुम देश के असली मुद्दों पर बोलने में हिचकिचाते हो।'