एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना शुरू कर दिया है। इससे हवाई यात्रियों पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ को देखते हुए केंद्र सरकार अब सक्रिय हो गई है। सरकार ने अभी कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है लेकिन एयरलाइंस से उनकी प्राइसिंग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि टिकट किरायों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो। सरकार चाहती है कि एयरलाइंस लागत बढ़ने का पूरा बोझ सीधे यात्रियों पर न डालें बल्कि इसे संतुलित तरीके से संभालें।
हाल ही में सरकार ने एविएशन सेक्टर को सपोर्ट देने के लिए एटीएफ की कीमतों में कुल 25% तक बढ़ोतरी की अनुमति दी थी। हालांकि घरेलू उड़ानों के लिए इसका असर सीमित रखते हुए करीब 8.5% तक ही बढ़ोतरी लागू की गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय और चार्टर्ड उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में बड़ी छलांग देखने को मिली है।
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद देश की बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपना फ्यूल सरचार्ज स्ट्रक्चर बदल दिया है। पहले जहां 425 रुपए का फ्लैट चार्ज लगता था अब दूरी के आधार पर नया सिस्टम लागू किया गया है।
नई दरें 2 अप्रैल से लागू हो चुकी हैं।
एविएशन सेक्टर में फ्यूल की हिस्सेदारी कुल लागत का करीब 40% होती है। ऐसे में एटीएफ के दाम बढ़ने का सीधा असर एयरलाइंस के खर्च और मुनाफे पर पड़ता है। इसी वजह से कंपनियां बेस किराया बढ़ाने की बजाय फ्यूल सरचार्ज जोड़ती हैं।
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मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद एयरलाइंस को अपने सरचार्ज पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। अगर बातचीत सफल रहती है तो आने वाले समय में कुछ रूट्स पर सरचार्ज में कटौती या राहत मिल सकती है।