जबलपुर:दमुआ नगर पालिका अध्यक्ष पद आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- उचित समय पर दें चुनौती

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा जिले की दमुआ नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई है इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। हालांकि याचिकाकर्ता को उचित समय आने पर इस मुद्दे को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी गई है। यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनाया।
क्या थी याचिका?
दमुआ निवासी सोनू धोटे ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2008 से दमुआ नगर पालिका अध्यक्ष का पद लगातार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह व्यवस्था रोटेशन प्रणाली के सिद्धांत के विपरीत है। नियमानुसार अध्यक्ष पद का आरक्षण अलग-अलग वर्गों के बीच बदलना चाहिए ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को रोटेशन प्रणाली का सही और प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं, जिससे लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था की भावना कायम रहे।
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सरकार ने उठाया ग्राह्यता का मुद्दा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव ने याचिका की ग्राह्यता (Maintainability) पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि वर्तमान परिस्थितियों में इस याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं बनता।
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मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता भविष्य में, जब चुनाव प्रक्रिया या आरक्षण अधिसूचना जारी होगी तब संबंधित मंच या चुनाव आयोग के समक्ष इस मुद्दे को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र रहेगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया।












