जबलपुर:राजस्थान पुलिस की गिरफ्तारी मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी, अवैध हिरासत साबित होने पर युवक मांग सकेंगे मुआवजा

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस द्वारा भोपाल से गिरफ्तार किए गए तीन युवकों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे स्वयं को अवैध हिरासत का शिकार मानते हैं तो सक्षम मंच पर मुआवजे का दावा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने पारित किया।
रिहाई के बाद याचिकाओं का किया निराकरण
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चूंकि तीनों युवक अब रिहा हो चुके हैं इसलिए उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं रह गई है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाओं का निराकरण कर दिया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि युवकों को लगता है कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था तो वे मुआवजा पाने के लिए सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंच का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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क्या है पूरा मामला?
मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ी एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित है। आरोप है कि इस पोस्ट को वायरल करने के मामले में भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने तीन युवकों बिलाल खान, निखिल प्रजापति और इनाम अहमद को हिरासत में लेकर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया था। तीनों युवकों ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।
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दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई जारी रखने के निर्देश
MP High Court ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस मामले में जिन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, उसे बीच में न रोका जाए और नियमानुसार अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। अदालत के इस आदेश के बाद अब तीनों युवक यदि चाहें तो कथित अवैध हिरासत को आधार बनाकर मुआवजे के लिए अलग से कानूनी दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।












