दमोह का नसेनिया फॉल; यहां आएंगे तो देखते रह जाएंगे मनोरम नजारा, प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीनता का संगम
दमोह-छतरपुर सीमा के सिलापरी गांव के पास स्थित नसेनिया फॉल बारिश के मौसम में प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षक केंद्र बन जाता है। झरने, हरियाली और चट्टानी पहाड़ियों के साथ यहां प्रागैतिहासिक शैल चित्र भी मौजूद हैं। चट्टानों पर बने मानव और पशु आकृतियों वाले चित्र क्षेत्र के प्राचीन मानव जीवन और इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।

दमोह का नसेनिया वाटर फॉल।
दमोह। दमोह जिला प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ प्राचीन और पुरातात्विक विरासत को भी अपने भीतर समेटे हुए है। जिले में पहाड़, जंगल, नदी और झरने जहां प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, वहीं विभिन्न स्थानों पर गुफाओं और चट्टानों पर बने प्रागैतिहासिक शैल चित्र इस क्षेत्र के प्राचीन मानव जीवन की कहानी भी कहते हैं। ऐसा ही प्राकृतिक स्थल दमोह-छतरपुर सीमा पर ग्राम सिलापरी के समीप स्थित नसेनिया फॉल है।
बारिश में झरना और सौंदर्य
सिलापरी के निकट जंगल क्षेत्र से बहने वाला पानी पथरीले और चट्टानी रास्तों से होकर नीचे गिरता है, जिससे यहां आकर्षक झरना आकार लेता है। बारिश के दिनों में जब पहाड़ियों और जंगलों में हरियाली छा जाती है और चट्टानों के बीच से पानी का प्रवाह बढ़ता है, तब नसेनिया फॉल का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। ऊंचाई से गिरता पानी, आसपास फैली हरियाली, चट्टानी पहाड़ियां और शांत वातावरण लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। बारिश के मौसम में स्थानीय लोग यहां प्राकृतिक नजारे देखने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।
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चट्टानों पर आज भी दिखाई देते हैं शैल चित्र

नसेनिया फॉल की खासियत केवल झरना और प्राकृतिक दृश्य ही नहीं हैं। इसके आसपास की चट्टानों पर प्रागैतिहासिक शैल चित्र भी दिखाई देते हैं। हालांकि समय के साथ इन चित्रों की रंगत फीकी पड़ गई है, लेकिन ध्यान से देखने पर कुछ स्थानों पर मानव और पशु आकृतियां नजर आती हैं। ये शैल चित्र इस क्षेत्र में प्राचीन मानव की मौजूदगी और उसकी जीवनशैली के अध्ययन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। चट्टानों की बनावट और आसपास मौजूद गुफानुमा आश्रयों को देखकर यह संभावना भी व्यक्त की जाती है कि प्राचीन काल में मानव ने इन प्राकृतिक शैलाश्रयों का उपयोग मौसम और जंगली जानवरों से बचाव के लिए किया होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नसेनिया फॉल को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए, तो यहां सुरक्षित पिकनिक स्थल बन सकता है।












