तीसरी बार नर्मदा परिक्रमा पर दादा गुरु : बोले- ये एक ऐसी साधना है, जो व्यक्तित्व का निर्माण करती है; चार सालों से कर रहे निराहार व्रत साधना

धार। मां नर्मदा सेवा परिक्रमा के तहत मां नर्मदा पथ के परम तपस्वी अवधूत संत श्री दादा गुरु का बाकानेर से ग्राम कालीबावड़ी में आगमन हुआ। बड़ी संख्या में भक्तजन दादा गुरु के दर्शन और चरण वंदना के लिए पहुंचे। भक्तों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने नर्मदा परिक्रमा के साथ ही भारतीय पहनावे के बारे में भी बताया। बता दें कि, दादा गुरु मां नर्मदा के संरक्षण और पर्यावरण रक्षा का संदेश देने के लिए लगातार चार सालों से मात्र नर्मदा जल ग्रहण कर निराहार महाव्रत साधना कर रहे हैं।
दादा गुरु ने आगे कहा कि, इस पर चिंतन करो और गांव-गांव बताओ कि, दुनिया जान चुकी है। एक संस्कृति और एक सभ्यता ही है, जो सबसे बेहतर और सबसे सुरक्षित जीवन दे सकती है। जिसे हम हिंदू संस्कृति, हिंदू सभ्यता कहते हैं। आज कई लोग चिंतन करते हैं। जब लोगों को कोई भी संकट आता है, तो नदीयों से प्रार्थना करते हैं और कामना करते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। अब उन्हें कौन समझाए यह गंगा, जमुना, कावेरी नदीयां नहीं हमारी आराधना है। हमारी शक्तियां है जो हमें ऊर्जा देती हैं। जीवन को सही दिशा में ले जाने का मार्गदर्शन देती है।
वहीं भारतीय पहनावे को लेकर दादा गुरु का कहना था कि, जींस-टी शर्ट भारतीय पहनावा नहीं है। हमारा पहनावा धोती-कुर्ता है। दादा गुरु ने कहा कि, ईश्वर की साधना में भारतीय पहनावा पहनना चाहिए।
सनातन धर्म से जुड़ रहे देश-विदेश के लोग
कालीबावड़ी में दादा गुरु ने बताया कि, नर्मदा परिक्रमा एक साधना है, एक आराधना है। यह एक ऐसी साधना जो व्यक्तित्व का निर्माण करती है। नर्मदा परिक्रमा से व्यक्तित्व जीवन जीने की नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि, लोग जानना चाहते हैं भारत के पास वह कौन सी शक्तियां हैं। जिससे भारत आज विश्व स्तर पर सम्पन्न है। अगर उन शक्तियों के बारे में बात करें तो, आज देश-विदेश के लोग हमारे सनातन धर्म से जुड़ रहे हैं। जबकि हमारे गांव सनातन संस्कृति से दूर हो रहे हैं।
दादा गुरु ने आगे कहा कि, इस पर चिंतन करो और गांव-गांव बताओ कि, दुनिया जान चुकी है। एक संस्कृति और एक सभ्यता ही है, जो सबसे बेहतर और सबसे सुरक्षित जीवन दे सकती है। जिसे हम हिंदू संस्कृति, हिंदू सभ्यता कहते हैं। आज कई लोग चिंतन करते हैं। जब लोगों को कोई भी संकट आता है, तो नदीयों से प्रार्थना करते हैं और कामना करते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। अब उन्हें कौन समझाए यह गंगा, जमुना, कावेरी नदीयां नहीं हमारी आराधना है। हमारी शक्तियां है जो हमें ऊर्जा देती हैं। जीवन को सही दिशा में ले जाने का मार्गदर्शन देती है।
वहीं भारतीय पहनावे को लेकर दादा गुरु का कहना था कि, जींस-टी शर्ट भारतीय पहनावा नहीं है। हमारा पहनावा धोती-कुर्ता है। दादा गुरु ने कहा कि, ईश्वर की साधना में भारतीय पहनावा पहनना चाहिए।
आरती के बाद भंडारे का आयोजन
मां नर्मदा की आरती के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। मांडू मार्ग में जगदीश कटारे द्वारा सभी परिक्रमा वासियों को जलपान व चाय की नि:शुल्क सेवा दी गई। मांधाता विधानसभा से नारायण पटेल के पुत्र प्रीतम पटेल दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा में साधारण वेशभूषा में पदयात्रा करते नजर आए।











