CM VIJAY:फ्लोर टेस्ट के बाद विजय का मास्टरस्ट्रोक या दबाव? अपने ज्योतिषी को OSD के पद से हटाया

चेन्नई। तमिलनाडु में नई बनी TVK सरकार एक बड़े फैसले को लेकर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री थलापति विजय ने अपने ज्योतिषी राधन पंडित वेत्रिवेल को मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी (OSD) पद से हटा दिया है। यह फैसला फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने के तुरंत बाद लिया गया। सरकार के इस कदम के पीछे विपक्ष और सहयोगी दलों की लगातार आपत्ति को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
फ्लोर टेस्ट के बाद अचानक बड़ा फैसला
तमिलनाडु में विश्वास मत जीतने के कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री विजय ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया। उन्होंने अपने करीबी माने जाने वाले ज्योतिषी राधन पंडित वेत्रिवेल को ओएसडी पद से हटा दिया। यह फैसला अचानक सामने आया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम बढ़ते विवाद को रोकने के लिए उठाया है।
ज्योतिषी की नियुक्ति पर पहले से था विवाद
राधन पंडित वेत्रिवेल को OSD बनाए जाने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था। विपक्षी दलों के साथ साथ सहयोगी पार्टियों ने भी इस नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सरकारी पद पर किसी ज्योतिषी की नियुक्ति तमिलनाडु की तर्कवादी राजनीति के खिलाफ है। लगातार हो रहे विरोध ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था।
कौन हैं राधन पंडित वेत्रिवेल
राधन पंडित वेत्रिवेल केवल एक ज्योतिषी ही नहीं बल्कि TVK के प्रवक्ता भी रह चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वे पार्टी के करीबियों में शामिल थे और कई बार सार्वजनिक रूप से थलापति विजय के समर्थन में बयान दे चुके हैं। कहा जाता है कि उन्होंने पहले ही चुनाव परिणाम को लेकर सकारात्मक भविष्यवाणी कर दी थी, जिसके बाद उनकी पहचान और मजबूत हुई।

विपक्ष और सहयोगियों की आपत्ति
जैसे ही उनकी नियुक्ति हुई, विपक्ष ने इसे मुद्दा बना दिया। कई दलों ने कहा कि यह कदम सरकार की छवि को प्रभावित करता है। सहयोगी दलों ने भी इस फैसले से दूरी बना ली और इसे गलत बताया। उनका तर्क था कि सरकार को वैज्ञानिक सोच और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि किसी धार्मिक या ज्योतिषीय भूमिका को।
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सरकार पर बढ़ता दबाव
लगातार आलोचना के बाद TVK सरकार पर दबाव बढ़ता गया। फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद भी सरकार विवादों से बचना चाहती थी।मुख्यमंत्री थलापति विजय अब अपनी सरकार की छवि को संतुलित करने में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि वे किसी भी ऐसे मुद्दे को बढ़ने नहीं देना चाहते जो राजनीतिक अस्थिरता पैदा करे। ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि विपक्ष को नया मुद्दा न मिले।











