गोविंद नारायण सिंह जयंती : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया नमन, कहा- सेवा और नैतिकता का जीवन आज भी प्रेरणा

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के परिजन उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के सार्वजनिक जीवन और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने भी उनके आदर्शों को वर्तमान राजनीति के लिए प्रेरणादायी बताया।
सेवा, समर्पण और नैतिकता से मिलेगी नई पीढ़ी को प्रेरणा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों और जनसेवा की भावना ही किसी नेता की सबसे बड़ी पहचान होती है।
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राजनीतिक परिवर्तन के दौर में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया। लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ऐसा रहा गोविंद नारायण सिंह का सार्वजनिक जीवन
गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एमए और एलएलबी तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया। उनका राजनीतिक जीवन जनसेवा, प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। 10 मई 2005 को उनका निधन हुआ था।
स्वतंत्रता आंदोलन से लोकतांत्रिक राजनीति तक का सफर
मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह राज्य में तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र बिंदु थे। वे रीवा के निवासी थे। उन्होंने सादगी, निष्पक्षता के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई थी। सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनका स्मरण कर रहे हैं। उन्होंने राजमाता सिंधिया के कार्यकाल में जनता की आवाज बनकर यह भरोसा दिलाया था कि पक्ष हो या विपक्ष, अब राजनीति में बदलाव का समय है। सिंह प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल बने।
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पुष्पांजलि कार्यक्रम की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती एवं पुण्यतिथि पर नियमित रूप से पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित कराने की उत्कृष्ट पहल की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रदेश के राजनीतिक इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की परंपरा से परिचित कराते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेकर ही समाज और प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।












