पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कोलकाता और मेदिनीपुर के क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क और चुनावी प्रचार किया। उनका यह दौरा खासा चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने न केवल भाजपा प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा बल्कि राज्य की मौजूदा स्थिति और भविष्य को लेकर भी कई बड़े राजनीतिक बयान दिए।
कोलकाता के कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद गलियों में उतरकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने वार्ड संख्या 24 और 112 में पैदल घूमकर दुकानदारों, स्थानीय नागरिकों और परिवारों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अरूप चौधरी के लिए समर्थन की अपील की और लोगों से बातचीत करते हुए उनके मुद्दों को भी सुना। स्थानीय लोगों ने उनके सामने बेरोजगारी, महंगाई, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं रखीं, जिस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि भाजपा की सरकार बनती है तो इन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

अपने संबोधन और बातचीत में डॉ. मोहन यादव ने बार बार इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं चाहती बल्कि बदलाव और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य में लंबे समय से विकास की गति धीमी पड़ी है और जनता अब नई ऊर्जा और नई नीतियों की उम्मीद कर रही है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्य तेज गति से विकास कर रहे हैं और बंगाल भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ सकता है अगर यहां डबल इंजन की सरकार बनती है।
मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कोलकाता के कुछ अंदरूनी इलाकों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है। उनके अनुसार रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण कई लोग मजबूरी में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के पास विकास के लिए हर तरह की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन सही नीति और मजबूत नेतृत्व की कमी के कारण राज्य अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है।
डॉ. मोहन यादव ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से राज्य में विकास की गति प्रभावित हुई है और कानून - व्यवस्था को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल पहले देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता था लेकिन पहले वामपंथी शासन और उसके बाद टीएमसी सरकार के दौरान विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई। उन्होंने इसे कुशासन और जंगलराज से जोड़ते हुए कहा कि जनता अब इससे छुटकारा चाहती है और एक स्थिर, विकास उन्मुख सरकार की तलाश में है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने प्रचार के दौरान डबल इंजन सरकार के फॉर्मूले को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही विचारधारा की सरकार होती है तो विकास योजनाओं को लागू करने में आसानी होती है और परिणाम तेजी से दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सरकार बनने पर बंगाल में विकास की गति तेज होगी, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने खास तौर पर युवाओं की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बंगाल में रोजगार की कमी के कारण युवा वर्ग असंतुष्ट है और बेहतर अवसरों की तलाश में बाहर जा रहा है। उन्होंने इसे राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताया। उनके अनुसार अगर सही नीतियां लागू की जाएं तो यही युवा शक्ति राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
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कोलकाता के बाद मोहन यादव ने मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर विधानसभा सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार करने की योजना बनाई। यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल को अगर देश के अन्य विकसित राज्यों के साथ कदम मिलाकर चलना है तो उसे राजनीतिक स्थिरता और विकास की स्पष्ट दिशा की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस चुनाव में मजबूत स्थिति में उभर रही है और जनता बदलाव के मूड में है।
चुनावी बहस के दौरान SIR प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत सभी राज्यों में लागू की जा रही है ताकि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया अवैध घुसपैठ और फर्जी मतदाताओं की पहचान में मददगार साबित होती है जिससे चुनाव प्रणाली और मजबूत होती है।
अपने पूरे दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संदेश देने की कोशिश की कि पश्चिम बंगाल में बदलाव की लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब विकास, सुरक्षा और रोजगार को प्राथमिकता दे रही है। उनके अनुसार अगर भाजपा को मौका मिलता है तो बंगाल एक बार फिर से देश के अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक तरफ भाजपा अपने प्रचार अभियान को पूरी ताकत से आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री यादव का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर राज्य के मुद्दों को उठाया और विकास का अपना दृष्टिकोण रखा। अब देखना यह होगा कि जनता किस दिशा में अपना फैसला देती है और बंगाल की राजनीति किस नए मोड़ पर पहुंचती है।
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