Civil Services Day Special:पूर्व DGP अरुण गुर्टू ने कहा- ‘दबावों में फैसलों से सिविल सर्विसेज पर भरोसा कमजोर हुआ’

सिविल सर्विसेज की कार्यप्रणाली और बदलते स्वरूप को लेकर पूर्व पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि आज फैसले बढ़ते दबावों में लिए जा रहे हैं जिससे आम जनता का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।
पूर्व DGP अरुण गुर्टू ने कहा- ‘दबावों में फैसलों से सिविल सर्विसेज पर भरोसा कमजोर हुआ’

विजय एस गौर। सिविल सर्विसेज की कार्यप्रणाली और बदलते स्वरूप को लेकर पूर्व पुलिस महानिदेशक अरुण गुर्टू ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि आज फैसले बढ़ते दबावों में लिए जा रहे हैं जिससे आम जनता का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन में केवल अधिकारी की लीडरशिप नहीं होती बल्कि पूरा विभाग उसके फैसलों से प्रभावित होता है।

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अधिकारी के फैसले से तय होती है विभाग की छवि

अरुण गुर्टू के मुताबिक किसी भी अधिकारी की कार्यशैली और उसके फैसले पूरे विभाग की छवि बनाते या बिगाड़ते हैं। पहले के दौर में अधिकारी दबाव में नहीं आते थे और गलत काम के लिए साफ मना कर देते थे लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

संसाधन बढ़े लेकिन इंटेलिजेंस कमजोर

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस विभाग में वाहन, हथियार और अन्य संसाधनों में बढ़ोतरी हुई है। अधिकारियों की संख्या भी बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद इंटेलिजेंस कलेक्शन में कमी आई है और उसकी सटीकता भी घटी है। खासकर संगठित अपराध पर नियंत्रण को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। रेत माफिया, शराब, ड्रग्स और वन माफिया जैसे मामलों में समस्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।

‘सेवा’ से ज्यादा ‘शासन’ का भाव खतरनाक

पूर्व DGP का मानना है कि सिविल सर्विसेज में अब ‘सेवा’ की भावना कम और ‘शासन’ का भाव ज्यादा नजर आने लगा है जो बेहद खतरनाक संकेत है। कई बार अधिकारी व्यक्तिगत सोच या पसंद के आधार पर फैसले लेते हैं जिससे छोटी समस्याएं भी बड़ी बन जाती हैं।

जन अपेक्षाओं पर खरा उतरना बड़ी चुनौती

अरुण गुर्टू ने कहा कि जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन की ओर उम्मीद से देखती है लेकिन आज के समय में राजनीतिक, धार्मिक, जातीय और क्षेत्रीय दबाव भी बढ़ गए हैं। ऐसे में अधिकारी के लिए निष्पक्ष निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कई बार मैदानी स्तर पर लिए गए फैसलों को ऊपरी स्तर पर बदल दिया जाता है जिससे सिस्टम में असंतुलन पैदा होता है।

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सिस्टम में संतुलन और ईमानदारी जरूरी

उन्होंने जोर देकर कहा कि सिविल सर्विसेज में संतुलन, पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी है। अगर अधिकारी दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष फैसले लें और जनहित को प्राथमिकता दें तभी सिस्टम पर जनता का भरोसा मजबूत हो सकता है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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