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सुई को कहिए अलविदा!12 मिनट में असर दिखाएगी सांस से ली इंसुलिन

भारत में डायबिटीज के इलाज में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब इंसुलिन के लिए रोज-रोज इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। Cipla भारत में ‘अफ्रेजा’ नाम की रैपिड-एक्टिंग इन्हेल्ड इंसुलिन लॉन्च करने जा रही है, जिसे मरीज सांस के जरिए ले सकेंगे। इस नए इलाज को CDSCO से मंजूरी मिल चुकी है।
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12 मिनट में असर दिखाएगी सांस से ली इंसुलिन
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारत में डायबिटीज एक गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारी बन चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोग शुगर से जूझ रहे हैं। इनमें करीब 10 लाख मरीज टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं, जिन्हें रोजाना इंसुलिन की जरूरत होती है। टाइप-2 डायबिटीज के कई मरीजों को भी इलाज के दौरान इंसुलिन लेनी पड़ती है। अब तक इंसुलिन लेने का मतलब था रोज का इंजेक्शन, दर्द और डर। लेकिन अब इसमें बड़ा अपडेट सामने आया है।

    अब तक इंसुलिन शरीर में इंजेक्शन के जरिए दी जाती थी, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। हालांकि, सुई का डर, दर्द और बार-बार इंजेक्शन लेने की परेशानी कई मरीजों के लिए बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या को देखते हुए दवा कंपनी Cipla ने डायबिटीज के इलाज में एक नया रास्ता खोलने का ऐलान किया है।

    Cipla भारत में लॉन्च करेगी इन्हेल्ड इंसुलिन

    Cipla ने घोषणा की है कि वह भारत में ‘अफ्रेजा’ (Afrezza) नाम की रैपिड-एक्टिंग इन्हेल्ड इंसुलिन लॉन्च करने जा रही है। यह इंसुलिन पाउडर के रूप में होगी, जिसे मरीज सांस के जरिए शरीर में ले सकेंगे। यानी अब इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह उन मरीजों के लिए बड़ी राहत है, जो सुई से डरते हैं या लंबे समय तक इंसुलिन लेने से कतराते हैं।

    सरकार से मिल चुकी है मंजूरी

    कंपनी के अनुसार, इस नई इंसुलिन को भारत की दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) से मंजूरी मिल चुकी है। यह मंजूरी पिछले साल के अंत में दी गई थी। इसके बाद अब Cipla इसे भारतीय बाजार में व्यावसायिक रूप से पेश करने की तैयारी में है।

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    कैसे काम करती है अफ्रेजा इंसुलिन?

    • अफ्रेजा एक रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन है, यानी यह बहुत तेजी से असर दिखाती है।
    • यह एक छोटे, हाथ में पकड़े जाने वाले इन्हेलर के जरिए ली जाती है।
    • इंसुलिन पाउडर सिंगल-यूज कार्ट्रिज में आता है।
    • डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार कार्ट्रिज लगाकर मरीज इसे सांस के साथ अंदर लेता है।
    • कंपनी का दावा है कि इंसुलिन लेने के करीब 12 मिनट के भीतर ब्लड शुगर कम होना शुरू हो जाता है।
    • आमतौर पर इसे दिन के भोजन के समय लेने की सलाह दी जाती है।

    किसके लिए फायदेमंद है यह इलाज?

    Cipla ने बताया है कि यह इन्हेल्ड इंसुलिन टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज वाले वयस्क मरीजों के लिए इंजेक्टेबल प्रैंडियल इंसुलिन का एक विकल्प है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंजेक्शन का डर, इलाज की जटिल प्रक्रिया और मानसिक झिझक के कारण कई मरीज इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में देरी करते हैं या बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में सांस से ली जाने वाली इंसुलिन इलाज को आसान बना सकती है।

    अमेरिका में होता है अफ्रेजा का निर्माण

    अफ्रेजा का निर्माण अमेरिका की MannKind Corporation द्वारा किया जाता है। Cipla इसे भारत में एक्सक्लूसिव रूप से डिस्ट्रीब्यूट और मार्केट करेगी। कंपनी अपने मजबूत वितरण नेटवर्क के जरिए इसे ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुंचाने की योजना बना रही है।

    Cipla का क्या कहना है?

    Cipla के ग्लोबल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर का कहना है कि अफ्रेजा के लॉन्च से कंपनी के डायबिटीज पोर्टफोलियो में एक नया और प्रभावी विकल्प जुड़ गया है। उनका कहना है कि भारत जैसे देश में, जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहां ऐसे इनोवेटिव इलाज की बेहद जरूरत है।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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