छिंदवाड़ा में 32 पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस, जिला प्रशासन के निर्देश पर कार्रवाई

छिंदवाड़ा। जिले में पटवारियों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। कार्य बहिष्कार में शामिल 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को सेवा समाप्ति के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। कलेक्टर हरेंद्र नारायण के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई से पटवारी संवर्ग में नाराजगी बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज पर पड़ने की आशंका है।
स्वामित्व योजना बनी टकराव की बड़ी वजह
प्रदेश में पटवारियों और प्रशासन के बीच विवाद की प्रमुख वजह स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर सामने आई है। पटवारी संघ का कहना है कि योजना के अंतर्गत संपत्तियों के रिकॉर्ड, नाम, रकबे और वास्तविक स्थिति में विसंगतियां होने पर उन्हें गंभीर व्यावहारिक और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। संघ की आपत्ति संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका और उनकी जवाबदेही को लेकर है। दूसरी ओर, प्रशासन का जोर शासकीय योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने और लंबित कार्यों में तेजी लाने पर है। इसी बीच कुछ जिलों में परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त करने और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके विरोध में पटवारी संघ ने आंदोलन तेज कर दिया है।
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7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों का बहिष्कार
प्रदेश स्तर पर पटवारी संघ के आह्वान पर 7 अक्टूबर से ऑनलाइन राजस्व कार्यों के बहिष्कार किया जा रहा है। संघ ने विभिन्न जिलों में परिवीक्षाधीन पटवारियों के खिलाफ की गई सेवा समाप्ति और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने की मांग उठाई है। कई जिलों में पटवारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया है। छिंदवाड़ा में 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को जारी नोटिस इसी घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
आम जनता के काम अटकने की आशंका
पटवारियों के कामकाज से दूरी बनाने का असर आम नागरिकों पर पड़ सकता है। जमीन संबंधी नामांतरण, सीमांकन, राजस्व अभिलेखों में सुधार, खसरा-बी-1 की जानकारी, आय एवं निवास प्रमाणपत्रों के लिए जरूरी सत्यापन और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में देरी की स्थिति बन सकती है। किसानों को भी भूमि संबंधी दस्तावेजों और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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