CG NEWS:फर्जी निकाह पर डिजिटल वार: अब QR कोड वाले निकाहनामा से होगी हर मुस्लिम शादी की निगरानी

PREM KUMAR RAIPUR। छत्तीसगढ़ में मुस्लिम विवाह व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य वक्फ बोर्ड बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब निकाहनामा खुले बाजार से नहीं खरीदा जा सकेगा। प्रत्येक निकाहनामा वक्फ बोर्ड द्वारा यूनिक नंबर और QR कोड के साथ जारी किया जाएगा। इसका उद्देश्य फर्जी निकाह, नाबालिग विवाह, जबरन शादी और कथित फर्जी निकाहनामों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। नियमों का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है और 7 जुलाई को धर्मगुरुओं की बैठक के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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निकाहनामा सिस्टम में बड़ा बदलाव
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने वर्षों पुराने निकाहनामा सिस्टम को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है। अब कोई भी काजी या मौलाना निजी प्रिंटिंग प्रेस या स्टेशनरी दुकान से निकाहनामा नहीं खरीद सकेगा। सभी प्रमाणपत्र केवल वक्फ बोर्ड द्वारा अधिकृत रूप से जारी किए जाएंगे।
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QR कोड से होगी हर शादी की डिजिटल पहचान
नई व्यवस्था में प्रत्येक निकाहनामा पर यूनिक QR कोड और सीरियल नंबर रहेगा। QR कोड स्कैन करते ही दूल्हा-दुल्हन, गवाह और विवाह से जुड़ी आवश्यक जानकारी सामने आ जाएगी। रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेगा, जिससे डुप्लीकेट या फर्जी निकाहनामे बनाना मुश्किल होगा।
5 भाषाओं में मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट
अब निकाहनामा पांच प्रतियों में जारी होगा। इसमें तीन प्रतियां उर्दू, एक हिंदी और एक अंग्रेजी भाषा में होगी। बहुभाषी दस्तावेज होने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणन आसान होगा।
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फर्जी निकाह कराने वालों पर होगी FIR
यदि कोई काजी या मौलाना नियमों का उल्लंघन कर फर्जी निकाह कराता है या गलत जानकारी दर्ज करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इससे निकाह कराने वालों की जवाबदेही भी तय होगी।
क्यों जरूरी पड़ा नया सिस्टम
वक्फ बोर्ड के अनुसार कुछ मामलों में बाहरी राज्यों से आए लोगों द्वारा बिना स्थानीय सत्यापन के निकाह कराए जाने, उम्र संबंधी गलत जानकारी दर्ज करने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतें मिली थीं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए डिजिटल सत्यापन आधारित व्यवस्था तैयार की गई है।
7 जुलाई की बैठक के बाद लागू होंगे नियम
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के अनुसार नए नियमों का विस्तृत ड्राफ्ट तैयार है। 7 जुलाई को प्रदेश के प्रमुख मौलानाओं, मुफ्तियों और इमामों से अंतिम सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।












