CG NEWS: छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, सरकार ने घटाई अतिरिक्त बिजली खरीद की दर

रायपुर न्यूज। छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने वाले हजारों उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने अतिरिक्त बिजली की खरीद (बायबैक) की नई दरें जारी कर दी हैं। नए आदेश के तहत अगले वित्त वर्ष से ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का भुगतान पहले की तुलना में करीब 22.4 प्रतिशत कम मिलेगा। इससे सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं की बचत और निवेश पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
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बड़ी खबर: सोलर बिजली खरीद दर में कटौती
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) ने रूफटॉप सोलर सिस्टम से उत्पादित अतिरिक्त बिजली की खरीद के लिए नई बायबैक दरें तय कर दी हैं। आयोग के आदेश के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खरीद दर 2.50 रुपये प्रति यूनिट और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.94 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है।
उपभोक्ताओं को क्यों लगा झटका?
नई दरें लागू होने के बाद अतिरिक्त बिजली बेचने वाले सोलर उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कम भुगतान मिलेगा। इसका सीधा असर उन परिवारों और संस्थानों पर पड़ेगा जिन्होंने अतिरिक्त बिजली बेचकर निवेश की लागत निकालने की योजना बनाई थी।
22 प्रतिशत तक घटेगा भुगतान
वित्त वर्ष 2026-27 में खरीद दर 2.50 रुपये से घटकर 1.94 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। यानी अतिरिक्त बिजली बेचने पर मिलने वाली राशि में करीब 22.4 प्रतिशत की कमी आएगी।
किस आधार पर लिया गया फैसला?
आयोग ने यह आदेश डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) विनियमों और राज्य विद्युत वितरण कंपनी से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जारी किया है। आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शी और एक समान भुगतान व्यवस्था लागू करना है।
क्या है नेट मीटरिंग सिस्टम?
नेट मीटरिंग व्यवस्था में सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली का पहले उपभोक्ता की खुद की खपत में समायोजन किया जाता है। यदि इसके बाद भी बिजली बचती है तो वह ग्रिड में चली जाती है और उसकी यूनिट उपभोक्ता के खाते में जमा होती रहती है।
साल के अंत में कैसे मिलता है पैसा?
वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर खाते में बची अतिरिक्त यूनिट का तय बायबैक दर के अनुसार भुगतान किया जाता है। यह राशि सीधे उपभोक्ता के बिजली खाते में क्रेडिट होती है और आगे आने वाले बिजली बिलों में समायोजित की जाती है।
निवेश पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बायबैक दर घटने से नए रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट लगाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। अतिरिक्त बिजली बेचकर होने वाली आय कम होने से निवेश की रिकवरी अवधि भी बढ़ सकती है।












