गरियाबंद। जिले में सक्रिय माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। सीनापाली और एसडीके एरिया कमेटी से जुड़े 9 हार्डकोर माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें 6 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने एके-47, एसएलआर और 303 राइफल समेत 6 ऑटोमैटिक हथियार पुलिस को सौंपे हैं। यह आत्मसमर्पण गरियाबंद पुलिस के लगातार नक्सल विरोधी अभियान का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।
अंजू उर्फ कविता - डीजीएन डिवीजन सचिव व एसडीके एसी सचिव, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ
बलदेव उर्फ वामनवट्टी - सीनापाली एसी प्रभारी, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ
डमरू उर्फ महादेव - डिवीजनल कमेटी सदस्य, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ
सोनी उर्फ बुदरी - सीनापाली एसी सचिव, 8 लाख की इनामी, SLR के साथ
रंजीत उर्फ गोविंद - एसी सदस्य, 5 लाख की इनामी, SLR के साथ
पार्वती उर्फ सुक्की - एसी सदस्य, 5 लाख की इनामी
रतना - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी, 303 राइफल के साथ
नवीता - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी
सरूपा - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी पिछले 15-20 वर्षों से संगठन में सक्रिय थे। कई माओवादी सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और बस्तर जिलों से जुड़े रहे और गरियाबंद क्षेत्र में विस्तार के लिए भेजे गए थे। इनके खिलाफ गरियाबंद जिले में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
माओवादियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में कठिन जीवन, लगातार पुलिस दबाव और शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने हथियार डालने का फैसला किया। आत्मसमर्पित माओवादियों ने यह भी बताया कि पहले सरेंडर कर चुके साथियों का बेहतर जीवन देखकर उन्हें मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिली।
सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने पर पद के अनुसार ईनाम राशि, आवास और रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। इसी नीति के तहत पहले भी कई माओवादी आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
इस आत्मसमर्पण में गरियाबंद पुलिस की E-30 टीम, CAF, STF, CRPF और COBRA बटालियन की अहम भूमिका रही। लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादी दबाव में थे।
जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, वे संपर्क कर सकते हैं-
नक्सल सेल गरियाबंद - 94792 27805