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CG Naxal Surrender :गरियाबंद में 9 इनामी माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, AK-47 समेत ऑटोमैटिक हथियार पुलिस को सौंपे

गरियाबंद में 9 माओवादी, जिनमें 6 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं, ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। सीनापाली और एसडीके एरिया कमेटी के ये इनामी माओवादी कुल 45 लाख रुपए के ईनाम पर थे। पुलिस की लगातार नक्सल विरोधी कार्रवाई और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
गरियाबंद में 9 इनामी माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, AK-47 समेत ऑटोमैटिक हथियार पुलिस को सौंपे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गरियाबंद। जिले में सक्रिय माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। सीनापाली और एसडीके एरिया कमेटी से जुड़े 9 हार्डकोर माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें 6 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    6 ऑटोमैटिक हथियार भी किए गए जमा

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने एके-47, एसएलआर और 303 राइफल समेत 6 ऑटोमैटिक हथियार पुलिस को सौंपे हैं। यह आत्मसमर्पण गरियाबंद पुलिस के लगातार नक्सल विरोधी अभियान का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

    इन प्रमुख माओवादियों ने किया सरेंडर

    अंजू उर्फ कविता - डीजीएन डिवीजन सचिव व एसडीके एसी सचिव, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ

    बलदेव उर्फ वामनवट्टी - सीनापाली एसी प्रभारी, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ

    डमरू उर्फ महादेव - डिवीजनल कमेटी सदस्य, 8 लाख की इनामी, AK-47 के साथ

    सोनी उर्फ बुदरी - सीनापाली एसी सचिव, 8 लाख की इनामी, SLR के साथ

    रंजीत उर्फ गोविंद - एसी सदस्य, 5 लाख की इनामी, SLR के साथ

    पार्वती उर्फ सुक्की - एसी सदस्य, 5 लाख की इनामी

    रतना - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी, 303 राइफल के साथ

    नवीता - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी

    सरूपा - पार्टी सदस्य, 1 लाख की इनामी

    लंबे समय से सक्रिय रहे थे माओवादी

    आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी पिछले 15-20 वर्षों से संगठन में सक्रिय थे। कई माओवादी सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और बस्तर जिलों से जुड़े रहे और गरियाबंद क्षेत्र में विस्तार के लिए भेजे गए थे। इनके खिलाफ गरियाबंद जिले में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    क्यों छोड़ा हिंसा का रास्ता?

    माओवादियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में कठिन जीवन, लगातार पुलिस दबाव और शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने हथियार डालने का फैसला किया। आत्मसमर्पित माओवादियों ने यह भी बताया कि पहले सरेंडर कर चुके साथियों का बेहतर जीवन देखकर उन्हें मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिली।

    शासन की पुनर्वास नीति बनी वजह

    सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने पर पद के अनुसार ईनाम राशि, आवास और रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। इसी नीति के तहत पहले भी कई माओवादी आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

    सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

    इस आत्मसमर्पण में गरियाबंद पुलिस की E-30 टीम, CAF, STF, CRPF और COBRA बटालियन की अहम भूमिका रही। लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादी दबाव में थे।

    आत्मसमर्पण के लिए संपर्क करें

    जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, वे संपर्क कर सकते हैं-

    नक्सल सेल गरियाबंद - 94792 27805

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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