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CG NEWS: 9वीं के छात्रों पर किताबों का संकट! CBSE स्कूलों में 3 विषयों की पुस्तकें गायब

छत्तीसगढ़ के CBSE स्कूलों में किताबों का संकट: 9वीं के छात्र पढ़ेंगे 6वीं की किताब, 3 विषयों की पुस्तकें बाजार से गायब CBSE द्वारा 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा को शामिल करने के बाद नया पाठ्यक्रम लागू किया गया, लेकिन किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। अप्रैल में आदेश लागू होने के बाद भी स्कूलों को जरूरी पुस्तकें नहीं मिल सकीं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
 9वीं के छात्रों पर किताबों का संकट! CBSE स्कूलों में 3 विषयों की पुस्तकें गायब

PREM KUMAR RAIPUR NEWS  छत्तीसगढ़ के CBSE स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं कक्षा के हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई किताबों की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। नई शिक्षा व्यवस्था लागू होने के बावजूद कई जरूरी पुस्तकें अब तक बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि विद्यार्थियों को फिलहाल 6वीं कक्षा की संस्कृत पुस्तक से पढ़ाई करनी पड़ रही है, जबकि गणित और सामाजिक विज्ञान की नई किताबें भी गायब हैं।

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नई शिक्षा नीति बनी नई परेशानी

CBSE द्वारा 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा को शामिल करने के बाद नया पाठ्यक्रम लागू किया गया, लेकिन किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। अप्रैल में आदेश लागू होने के बाद भी स्कूलों को जरूरी पुस्तकें नहीं मिल सकीं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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6वीं की किताब से होगी 9वीं की पढ़ाई

संस्कृत की नई पुस्तक बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण CBSE ने अस्थायी रूप से 6वीं कक्षा की संस्कृत पुस्तक से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

 गणित और सामाजिक विज्ञान की किताबें भी लापता

समस्या केवल संस्कृत तक सीमित नहीं है। गणित के एक भाग और सामाजिक विज्ञान की पुस्तक भी अभी तक प्रकाशित होकर बाजार में नहीं पहुंची है। इससे स्कूलों को वैकल्पिक अध्ययन सामग्री तैयार करनी पड़ रही है।

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परीक्षा से पहले मिलेगा सिर्फ दो महीने का समय

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार जिन पुस्तकों की कमी है, वे दिसंबर तक उपलब्ध हो सकती हैं। जबकि CBSE की वार्षिक परीक्षाएं फरवरी में शुरू हो जाती हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी के लिए मुश्किल से दो महीने का समय मिलेगा।

मूल्यांकन को लेकर बढ़ी चिंता

जब किताबें ही उपलब्ध नहीं हैं तो छात्रों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि पाठ्यक्रम लागू करने से पहले अध्ययन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।

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स्कूल प्रबंधन ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई महीने हो चुके हैं, लेकिन किताबों का इंतजार अभी भी जारी है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई स्वाभाविक रूप से प्रभावित होगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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