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Project Cheetah:कूनो के बाद अब गुजरात की बारी! NTCA के फैसले के बाद MP से 4 चीते होंगे शिफ्ट

भारत में चीता पुनर्वास अभियान अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में सफलतापूर्वक बस चुके चार अफ्रीकी चीतों को अब गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी घास के मैदानों में स्थानांतरित किया जाएगा। NTCA और चीता स्टीयरिंग कमेटी की मंजूरी के बाद यह कदम देश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
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कूनो के बाद अब गुजरात की बारी! NTCA के फैसले के बाद MP से 4 चीते होंगे शिफ्ट

श्योपुर। भारत में प्रोजेक्ट चीता अब एक नए और अहम चरण में पहुंच गया है। मध्य प्रदेश से चार अफ्रीकी चीतों को अब गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी घास के मैदानों में भेजने की तैयारी है। यह फैसला नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) और चीता स्टीयरिंग कमेटी की मंजूरी के बाद लिया गया है।

क्या है पूरा फैसला?

सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मिलकर तय किया है कि मध्य प्रदेश में सफलतापूर्वक अनुकूल हो चुके 4 चीतों- 2 नर और 2 मादा को अब एक नए प्राकृतिक आवास में स्थानांतरित किया जाएगा। इन चीतों को कूनो नेशनल पार्क से गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में भेजा जाएगा। उद्देश्य साफ है कि चीतों के लिए भारत में अलग-अलग सुरक्षित और स्थायी आवास तैयार करना, ताकि उनकी आबादी तेजी से बढ़ सके।

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बन्नी घास के मैदान क्यों चुने गए?

गुजरात के कच्छ जिले में स्थित बन्नी घास के मैदान अब भारत का नया चीता केंद्र बनने जा रहे हैं। यह क्षेत्र इसलिए चुना गया क्योंकि यहां विशाल घास के खुले मैदान हैं, मानव हस्तक्षेप बहुत कम है, शिकार और प्राकृतिक जीवन के लिए अनुकूल है और अफ्रीकी चीतों के लिए समान पारिस्थितिकी तंत्र मिलता है। इसी वजह से बन्नी को भारत का पहला चीता संरक्षण और प्रजनन केंद्र (Conservation Breeding Centre) बनाने की योजना है।

मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति

भारत में चीता पुनर्वास की शुरुआत 2022 में हुई थी। तब से मध्य प्रदेश इसका मुख्य केंद्र रहा है। कूनो अब भारत का सबसे बड़ा चीता बेस बन चुका है, जहां प्राकृतिक वातावरण में उनका जीवन धीरे-धीरे स्थिर हो रहा है। भारत में अब चीतों की संख्या कुल 57 हो गई है।

कूनो नेशनल पार्क (श्योपुर)

कुल चीते: 29
वयस्क: 8
शावक: 21
खुले जंगल में घूम रहे चीते: 19

गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य

मध्य प्रदेश में दूसरा चीता केंद्र गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को बनाया गया है। यह क्षेत्र नए पुनर्वास मॉडल के तौर पर विकसित हो रहा है। यहां 3 चीते मौजूद हैं। 

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चीता प्रोजेक्ट के बड़े आंकड़े

भारत में अब चीतों की संख्या कुल 57 हो गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत का वातावरण धीरे-धीरे चीतों के लिए अनुकूल बन रहा है।

  • जीवित रहने की दर: 61% (वैश्विक औसत 40% से ज्यादा)
  • वयस्क चीतों की जीवित रहने की दर:
  • पहले साल: 70%
  • दूसरे साल: 85.7%
  • कुल जन्मे शावक: 39
  • जीवित और स्वस्थ शावक: 27

चीता वापसी का पूरा सफर

भारत में चीता पुनर्वास एक ऐतिहासिक मिशन है, जिसकी शुरुआत हाल के वर्षों में हुई। इस पूरे सफर में सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि चीतों ने भारत के वातावरण में खुद को धीरे-धीरे ढाल लिया।

  • 17 सितंबर 2022: नामीबिया से 8 चीते कूनो लाए गए
  • 18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आए
  • 2023-2026: कई शावकों का जन्म हुआ
  • 2026: बोत्सवाना से 8 और चीते शामिल हुए

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर

एक्सर्ट्स मानते हैं कि बन्नी में चीते आने से सिर्फ वन्यजीव संरक्षण ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी बदल जाएगी। जिससे वाइल्डलाइफ टूरिज्म में बड़ा उछाल आएगा, स्थानीय रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, होटल, गाइड और ट्रैवल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और कच्छ क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत बनकर उभरेगा।

2032 का बड़ा लक्ष्य

भारत सरकार का लक्ष्य बहुत स्पष्ट है  लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60 से 70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी तैयार करना। 

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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