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नकल के शक पर पूरी क्लास ‘सज़ा के घेरे’ में… 300 बार लिखवाया गया माफीनामा, IMS में मचा बवाल

नकल के शक पर पूरी क्लास ‘सज़ा के घेरे’ में… 300 बार लिखवाया गया माफीनामा, IMS में मचा बवाल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के आईएमएस में एमबीए परीक्षा के दौरान कथित नकल के शक ने ऐसा तूल पकड़ा कि पूरे क्लासरूम को सजा का मैदान बना दिया गया। आरोप है कि परीक्षा खत्म होते ही प्रोफेसर ने सभी विद्यार्थियों को रोककर 300-300 बार “मैं नकल नहीं करूंगा” लिखने का फरमान सुना दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन छात्रों पर शक था, उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पूरी कक्षा को कठघरे में खड़ा कर दिया गया। देर तक घर नहीं पहुंचने पर छात्राओं के परिजनों में हड़कंप मच गया और मामला खुलते ही संस्थान में शिकायतों का दौर शुरू हो गया।

    आंतरिक परीक्षा के बाद प्रोफेसर ने उठाया   कदम

    बताया जा रहा है कि 23 मार्च को हुई आंतरिक परीक्षा के बाद प्रोफेसर भानुप्रताप सिंह ने यह सख्त कदम उठाया और सवाल करने पर साफ कह दिया कि कुछ छात्रों को नकल करते देखा गया है, इसलिए पूरी कक्षा को इसकी “सजा” भुगतनी होगी। मामला यहीं नहीं थमा—शिकायत होने के बाद शिक्षक पर दबाव बनाने के आरोप भी लगे। छात्रों को कथित तौर पर चेतावनी दी गई कि शिकायतकर्ता का नाम नहीं बताया गया तो पूरी क्लास को 1000 पन्नों का असाइनमेंट लिखना पड़ेगा।

    विरोध करने पर अभद्र व्यवहार 

    इस पूरे घटनाक्रम ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता वकील अनिमेष परमार ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और यहां तक कि उनका फोटो सोशल मीडिया पर डालकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। अब उन्होंने कानूनी नोटिस भेजने की बात कही है।

    सामूहिक सजा देना कितना जायज 

    सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नकल करने वालों पर सीधे कार्रवाई करने के बजाय पूरी कक्षा को इस तरह सामूहिक सजा देना कितना जायज है। वहीं संस्थान प्रबंधन भी इस विवाद पर खुलकर सामने आने से बचता नजर आ रहा है। आईएमएस के निदेशक डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें अब तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली है और मामला जांच में लिया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन के नाम पर मनमानी के आरोपों को एक बार फिर हवा दे दी है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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