Chattisgarh:पुलिस प्रमोशन पर बिलासपुर हाईकोर्ट की रोक, प्रमोशन प्रक्रिया जारी लेकिन नियुक्ति पर रोक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में चल रही आरक्षक से प्रधान आरक्षक पदोन्नति प्रक्रिया पर बड़ा अंतरिम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रमोशन की प्रक्रिया पर पूरी रोक नहीं लगाई लेकिन अंतिम आदेश जारी करने से विभाग को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला कोरबा जिले के 73 आरक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विभाग ने वरिष्ठता तय करने में नियमों का सही पालन नहीं किया और दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों को अनुचित लाभ दिया जा रहा है।
वरिष्ठता सूची को लेकर शुरू हुआ विवाद
प्रदेश के अलग अलग जिलों में इन दिनों आरक्षकों को प्रधान आरक्षक बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान कोरबा जिले के कई पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रमोशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि विभाग ने उन कर्मचारियों को वरिष्ठ मान लिया है, जो दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर कोरबा आए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इससे लंबे समय से कोरबा जिले में सेवा दे रहे आरक्षकों का हक प्रभावित हो रहा है। कई कर्मचारियों के नाम सूची में नीचे चले गए, जबकि कुछ को सूची से बाहर तक कर दिया गया।
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क्या कहते हैं सेवा नियम?
याचिका में छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती और पदोन्नति नियम 2007 का हवाला दिया गया है। नियमों के मुताबिक यदि कोई कर्मचारी अपनी इच्छा से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की वरिष्ठता सूची में उसका नाम सबसे नीचे माना जाएगा। आरक्षकों का कहना है कि मौजूदा प्रमोशन प्रक्रिया में इसी नियम की अनदेखी की जा रही है। विभाग पहली नियुक्ति की तारीख के आधार पर वरिष्ठता तय कर रहा है, जिससे ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों को फायदा मिल रहा है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद माना कि मामला सेवा नियमों के पालन से जुड़ा है और इसमें गंभीर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति अपनी प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी तरह का अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई समर वेकेशन के बाद 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
सरकार की ओर से क्या दलील दी गई?
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को याचिका में चुनौती नहीं दी गई है। सरकार ने यह भी बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई याचिकाकर्ताओं के नाम भी फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। कोर्ट ने फिलहाल अंतिम सूची जारी करने पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का फैसला लिया है।
1 जून को जारी होनी थी फाइनल सूची
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि विभाग 1 जून 2026 को अंतिम फिट लिस्ट जारी करने की तैयारी में था। यदि कोर्ट समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो प्रमोशन आदेश जारी हो जाते और बाद में याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता। इसी आधार पर कोर्ट से अंतरिम राहत मांगी गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
प्रमोशन के लिए ट्रांसफर का पुराना तरीका
पुलिस विभाग में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कई कर्मचारी प्रमोशन की संभावना बढ़ाने के लिए पुराने जिलों से नए जिलों में ट्रांसफर करा लेते हैं। नए जिलों में कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण वरिष्ठता सूची में जल्दी ऊपर आने का मौका मिल जाता है। इसके बाद प्रमोशन मिलने पर कई कर्मचारी दोबारा अपने पुराने जिले में लौट आते हैं। इसी व्यवस्था को लेकर अब विवाद खड़ा हुआ है और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
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बिलासपुर संभाग में 795 आरक्षक प्रमोशन के पात्र
आईजी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर संभाग में कुल 795 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक पद के लिए योग्य पाया गया है। सबसे ज्यादा बिलासपुर और रायगढ़ जिले से 230-230 आरक्षक पात्र हैं। इसके अलावा कोरबा से 85, जांजगीर-चांपा से 60, मुंगेली से 40, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से 40, सारंगढ़-बिलाईगढ़ से 60 और सक्ती जिले से 50 आरक्षक प्रमोशन सूची में शामिल किए गए हैं।











