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छग में शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक, दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को लेकर उठे सवाल

नियमों पर हाईकोर्ट सख्त, सभी आरक्षित श्रेणियों को आवेदन का मौका मिलने तक नहीं होगी परीक्षाछत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। दिव्यांग आरक्षण से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के आयोजन पर अंतरिम रोक लगा दी है। 11 और 25 अक्टूबर 2026 की परीक्षाएं अब निर्धारित तारीखों पर नहीं होंगी।
छग में शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट की रोक, दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को लेकर उठे सवाल

रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़े विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए भर्ती परीक्षाओं के आयोजन पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन में सभी संबंधित आरक्षित श्रेणियों को शामिल कर पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिए जाने तक परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इस आदेश से 11 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा और 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा प्रभावित हुई हैं।

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परीक्षा से पहले हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, भर्ती प्रक्रिया पर लगा ब्रेक

मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन को जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार, सभी संबंधित आरक्षित श्रेणियों को विज्ञापन में शामिल कर आवेदन का अवसर उपलब्ध कराने तक दोनों भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकेंगी। परीक्षा की निर्धारित तारीखें नजदीक होने और आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अभ्यर्थियों की नजर राज्य शासन के अगले कदम और भर्ती विज्ञापन में संभावित संशोधन पर है।

11 और 25 अक्टूबर की परीक्षा स्थगित, अभ्यर्थी रखें नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सहायक शिक्षक भर्ती की 11 अक्टूबर और शिक्षक भर्ती की 25 अक्टूबर 2026 की निर्धारित परीक्षाएं स्थगित हो गई हैं। परीक्षा की नई तारीखों को लेकर इस खबर में कोई आधिकारिक नई समय-सारणी उपलब्ध नहीं है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे परीक्षा की नई तारीख, आवेदन प्रक्रिया और संशोधित विज्ञापन से संबंधित जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और शासन के अधिकृत नोटिस पर नजर रखें।

संशोधित विज्ञापन या नया नोटिफिकेशन जारी कर सकती है सरकार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में संशोधन से संबंधित सूचना सहायक शिक्षक भर्ती के लिए जारी की गई, लेकिन शिक्षक भर्ती के विज्ञापन में आवश्यक बदलाव नहीं किया गया। राज्य शासन ने अदालत को बताया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन के संबंध में संशोधन की सूचना 9 अक्टूबर को रायपुर और बिलासपुर के समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई है। यह सूचना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड की गई है। शासन के अनुसार, संशोधन के तहत आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि जब आरक्षित पदों का श्रेणीवार वर्गीकरण किया गया है, तो पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की श्रेणी को शामिल नहीं करने का प्रथम दृष्टया कोई उचित कारण नजर नहीं आता। कोर्ट ने राज्य शासन को नियमानुसार संशोधित विज्ञापन जारी करने या सभी संबंधित आरक्षित श्रेणियों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकालने का विकल्प भी दिया है।

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आखिर क्यों पहुंचा मामला हाईकोर्ट? दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

कोरबा निवासी मीनाक्षी मंगलेकर और अन्य याचिकाकर्ताओं ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण से संबंधित प्रावधानों को चुनौती दी है। याचिका के अनुसार, विज्ञापन में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को उचित रूप से शामिल नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण संबंधित अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसे दिव्यांगजनों के अधिकारों और समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा मामला बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।

आवेदन की अंतिम तारीख निकलने का दिया गया तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने कहा कि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 थी, जो निकल चुकी है। ऐसे में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को अब आवेदन का अवसर देना संभव नहीं होने की बात रखी गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था और विज्ञापन में संबंधित श्रेणी को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। अदालत के अंतरिम आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी संबंधित आरक्षित श्रेणियों के पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिले और इसके बाद ही परीक्षा आयोजित की जाए।



क्या कहता है दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016?

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के तहत सरकारी प्रतिष्ठानों में सीधी भर्ती के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को कम से कम 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसमें दृष्टिहीनता और कम दृष्टि सहित अधिनियम में निर्दिष्ट दिव्यांगता श्रेणियां शामिल हैं। सामान्यतः बेंचमार्क दिव्यांगता के लिए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता निर्धारित मानदंडों के अनुसार प्रमाणित होना आवश्यक है। हालांकि, आरक्षण का वास्तविक लाभ संबंधित भर्ती नियमों, पद की पहचान और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होता है। इसी कानूनी व्यवस्था के तहत दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण और आवेदन के अवसर को लेकर यह विवाद हाईकोर्ट पहुंचा है।

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अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राज्य शासन को भर्ती विज्ञापन और आरक्षण व्यवस्था पर आगे की कार्रवाई करनी होगी। संबंधित श्रेणियों को शामिल कर आवेदन का अवसर देने की प्रक्रिया पूरी होने तक परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकेगी। अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यही है कि पुरानी परीक्षा तारीखों के आधार पर परीक्षा होने की उम्मीद न रखें और नई तारीखों के संबंध में केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। भर्ती की अगली प्रक्रिया शासन के संशोधित विज्ञापन और हाईकोर्ट में होने वाली आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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