Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

सबरीमाला मंदिर मामला:केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष, 'धार्मिक मामलों में कोर्ट को सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए'

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर एक बार फिर कानूनी और धार्मिक बहस तेज हो गई है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए साफ कहा है कि यह मामला लैंगिक भेदभाव का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा हुआ है।
Follow on Google News
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष, 'धार्मिक मामलों में कोर्ट को सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए'
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    केंद्र सरकार ने अदालत में दायर अपने जवाब में कहा कि 10 से 50 साल की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध भगवान अयप्पा के नैष्ठिक ब्रह्मचारी स्वरूप से जुड़ा है। यानि जीवनभर उन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन किया। सरकार का तर्क है कि इस परंपरा को बदलने से मंदिर की मूल पूजा-पद्धति प्रभावित होगी। साथ ही अदालत से आग्रह किया गया कि धार्मिक मान्यताओं की समीक्षा आधुनिक या वैज्ञानिक नजरिए से न की जाए।

    धार्मिक परंपरा और समानता का सवाल

    सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि मंदिर में प्रवेश से जुड़े नियम किसी भेदभाव की भावना से नहीं, बल्कि विशेष धार्मिक मान्यता पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु वर्षों से स्थापित परंपराओं का पालन करते आ रहे हैं और इसमें बदलाव धार्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    ये भी पढ़ें: Congress MLA Rajendra Bharti : राजेंद्र भारती केस में नया मोड़, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई 15 अप्रैल तक टाली

    सरकार ने अदालत की भूमिका पर उठाए सवाल

    केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालतों को धार्मिक मामलों में सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार का कहना है कि न्यायपालिका के पास धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या करने की विशेषज्ञता या संसाधन नहीं होते, ऐसे में आस्था से जुड़े मामलों में निर्णय सावधानी से लिया जाना चाहिए।

    ये भी पढ़ें: दयाबेन पर टूटा दुखों का पहाड़! पिता भीम वकानी का निधन, इंडस्ट्री में शोक की लहर

    2018 के फैसले पर पुनर्विचार

    यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं से जुड़ी है, जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। अब केंद्र ने अदालत से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की अपील की है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

    Latest Posts