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बुंदेलखंड, विंध्य और महाकोशल प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियां होने की उम्मीदें बढ़ीं

- 5 साल पहले कांग्रेस सरकार ने हटाए थे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विभाग ने मांगा बजट 
बुंदेलखंड, विंध्य और महाकोशल प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियां होने की उम्मीदें बढ़ीं
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। 18 साल पुराने बुंदेलखंड, महाकोशल और विंध्य विकास प्राधिकरण में भी राजनीतिक नियुक्तियां होने को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। यहां से पांच वर्ष पहले (6 मार्च 2019) कांग्रेस सरकार ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष हटा दिए थे। तब  से अधिकारी और कर्मचारी भी एक-एक करके अपने मूल विभाग में चले गए। 

    इस वित्तीय वर्ष में बजट प्रावधान भी नहीं किया गया। लेकिन, अब निगम-मंडलों में नई नियुक्तियां होने की संभावना को देखते हुए आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने द्वितीय अनुपूरक बजट में राशि उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इन तीनों प्राधिकरणों का गठन भाजपा सरकार में वर्ष 2007 में हुआ था। इसके पीछे उद्देश्य था कि जिलों में आर्थिक पिछड़ापन दूर करने के लिए निर्माण और विकास कार्य कराए जाएंगे। राज्य शासन ने प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों में राजनीतिक नियुक्तियां भी की जिससे उनके द्वारा क्षेत्र में विकास कार्य कराए जा सकें।

    इस तरह मिलता रहा प्राधिकरणों को बजट

    वित्तीय वर्ष बुंदेलखंड विंध्य महाकोशल
    2018-19 5.42 5.51 5.63
    2019-20 2.58 2.61 2.38
    2020-21 0.09 1.73 1.58
    2021-22 1.02 1.23 0.50
    2022-23 1.02 1.23 0.50
    2023-24 1.10 1.23 0.50
    2024-25 1.10 1.23 0.50
    2025-26 0.00 0.00 0.00

    (राशि करोड़ रुपए में)

    किस प्राधिकरण में कौन-कौन जिले हैं

    • बुंदेलखंड: सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना और दतिया
    • विंध्य: रीवा, शहडोल, सिंगरौली, सीधी, उमरिया, सतना, अनूपपुर और डिंडौरी
    • महाकोशल: जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा

    प्राधिकरण के पास 44 प्रमुख कार्य कराने की जिम्मेदारी

    • प्राधिकरणों को 44 प्रमुख कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा भवनों का निर्माण, निर्वाचन क्षेत्र में मौजूद विवि में बाउंड्रीबॉल, शौचालय आदि निर्माण।
    • शिक्षण संस्थाओं के लिए फर्नीचर, टाट-पट्टी क्रय करना, सार्वजनिक वाचनालय, अध्ययन कक्ष निर्माण।
    • गांवों, कस्बों अथवा नगरों में कुआं और नलकूप, प्याऊ, गर्मियों में पानी के टैंकर उपलब्ध कराना।
    • जेलों, शासकीय कन्या आश्रमों, अनाथालयों, अस्पतालों में पेयजल व्यवस्था करना।

    बजट कम मिलने से कमजोर हो रहे प्राधिकरण

    सरकार ने प्राधिकरण गठित जरूर कर दिए लेकिन साल दर साल इनका बजट कम होता चला गया और इस साल एक रुपया नहीं मिला। सबसे अधिक वर्ष 2018-19 में हर प्राधिकरण को 5 करोड़ से अधिक की राशि दी गई थी। इस राशि में पांच- छह जिलों का विकास करना होता है। 

    कर्मचारियों की स्थिति

    • विंध्य- शिक्षा विभाग का 1 कर्मचारी
    • महाकोशल-1 कर्मचारी
    • बुंदेलखंड- एक भी कर्मचारी नहीं
    वर्ष 2011-13 तक अध्यक्ष था। बजट कम  होने से छह जिलों का विकास कठिन था। हमने कई बार सरकार से बजट मांगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकातें कीं। हमने कहा था कि केंद्र से मिलने वाला बुंदेलखंड विशेष पैकेज को प्राधिकरण में शामिल किया जाए।
    - उमेश शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण
    द्वितीय अनुपूरक अनुमान में बजट उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। सेटअप के संबंध में समीक्षा करेंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
    - संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी
    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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