लखनऊ:वकीलों के चैंबर पर चला बुलडोजर: पुलिस कार्रवाई के बाद सियासत तेज, अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में जिला कोर्ट परिसर के बाहर बने वकीलों के चैंबर हटाने को लेकर रविवार को जमकर हंगामा हुआ। नगर निगम की टीम जब बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची तो कई वकीलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे धार्मिक भावनाओं से भी जोड़ दिया।
कोर्ट परिसर के बाहर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर नगर निगम ने रविवार सुबह अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। प्रशासन के अनुसार कोर्ट परिसर और उसके आसपास कई अवैध निर्माण किए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या में वकीलों के चैंबर और कुछ दुकानें शामिल थीं। इसी कार्रवाई के लिए नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई। नगर निगम ने पहले ही नोटिस जारी कर लोगों को जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई चैंबर खाली नहीं किए गए, जिसके बाद बुलडोजर चलाया गया।
बुलडोजर के सामने खड़े हुए वकील
कार्रवाई शुरू होते ही कई वकील विरोध में उतर आए। कुछ बुलडोजर के सामने खड़े हो गए और प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन बहस बढ़ती चली गई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। वहीं कुछ लोगों की तरफ से पुलिस पर पत्थर फेंके जाने की भी बात सामने आई। जवाब में पुलिसकर्मी भी खुद को बचाने की कोशिश करते दिखाई दिए।
रामचरितमानस की तस्वीर पर सियासत
घटना के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा की। तस्वीर में एक वकील के हाथ में रामचरितमानस दिखाई दे रही है और सामने पुलिसकर्मी खड़े नजर आ रहे हैं। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और मर्यादा का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ में जिस तरह इस ग्रंथ का अपमान हुआ, वह बेहद दुखद है। सपा प्रमुख ने भाजपा को “अधर्मी” बताते हुए कहा कि जनता अब ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
प्रशासन ने क्या कहा?
पुलिस और प्रशासन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोगों ने विरोध करते हुए सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति संभालने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई और बाद में माहौल शांत हो गया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार करीब 240 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से कई हटाए जा चुके हैं।
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पहले भी उठ चुका है चैंबर हटाने का मामला
यह पहली बार नहीं है जब कोर्ट परिसर के बाहर बने चैंबरों को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले साल 2020 में भी कुछ चैंबर हटाए गए थे, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार से पुनर्वास को लेकर सवाल पूछे थे। इसके बाद अक्टूबर 2025 में भी कुछ अस्थायी चैंबर तोड़े गए थे। इसी साल जनवरी में अवैध कब्जों को लेकर कई शिकायतें कोर्ट पहुंचीं। बाद में अदालत ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। नगर निगम ने 12 मई को लाल निशान लगाकर लोगों को जगह खाली करने का नोटिस दिया था।











