हाईकोर्ट का फैसला: BSF जवान की नौकरी बहाल, बर्खास्तगी का आदेश रद्द

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बीएसएफ के चयनित कॉन्स्टेबल (जीडी) राहुल जाटव को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को पलटते हुए नियुक्ति समाप्ति आदेश और अभ्यावेदन निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया तथा सभी परिणामी सेवा लाभों के साथ पुनर्नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।
खुद दी थी लंबित केस की जानकारी
राहुल जाटव का चयन एसएससी-जीडी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से बीएसएफ में हुआ था। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी स्वयं विभाग को उपलब्ध कराई थी। इसके बावजूद विभाग ने उनकी नियुक्ति समाप्त कर दी।बाद में संबंधित न्यायालय ने राहुल जाटव को उक्त आपराधिक मामले में दोषमुक्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने पुनर्नियुक्ति का अनुरोध भी अस्वीकार कर दिया।
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'तथ्य नहीं छिपाए, फिर भी नौकरी गई'
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृता जैन ने अदालत में तर्क दिया कि राहुल जाटव ने विभाग से कोई तथ्य नहीं छिपाया था। जिस प्रकरण के आधार पर कार्रवाई की गई, वह न तो जघन्य अपराध था और न ही नैतिक अधमता से जुड़ा मामला था। खंडपीठ ने माना कि विभाग की कार्रवाई मनमानी और कानून के विपरीत थी। न्यायालय ने कहा कि जिसने ईमानदारी से अपने विरुद्ध लंबित प्रकरण की जानकारी दी हो, उसे केवल ऐसे गैर-जघन्य मामले के आधार पर सरकारी सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।
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सभी सेवा लाभ भी मिलेंगे
हाईकोर्ट ने रिट अपील स्वीकार करते हुए नियुक्ति समाप्ति और अभ्यावेदन निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही राहुल जाटव की सेवा बहाल करने और उन्हें सभी परिणामी सेवा लाभ देने के निर्देश जारी किए।
पारदर्शिता को दंडित नहीं किया जा सकता
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सत्य और पारदर्शिता को दंडित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी तथ्यों को नहीं छिपाता और बाद में न्यायालय से दोषमुक्त हो जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का आधार है, न कि उसे सरकारी सेवा से वंचित करने का कारण।












