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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस : टिन्नू यादव समेत 8 आरोपी गिरफ्तार, ट्रस्ट की शिकायत पर FIR; क्या बड़े चेहरों तक पहुंचेगी जांच?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। SIT जांच के बाद FIR दर्ज हुई। जानिए किन लोगों पर आरोप लगे, किन धाराओं में केस दर्ज हुआ, जांच कहां तक पहुंची और आगे क्या कार्रवाई होगी।
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 टिन्नू यादव समेत 8 आरोपी गिरफ्तार, ट्रस्ट की शिकायत पर FIR; क्या बड़े चेहरों तक पहुंचेगी जांच?

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपए के गबन के मामले ने बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने इस मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को पुलिस सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी और पूछताछ के लिए 14 दिन की रिमांड मांग सकती है।

यह मामला केवल चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर में दान प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई यह एफआईआर अब पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला पहली बार 7 जून को सार्वजनिक हुआ था। आरोप लगाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए करोड़ों रुपए की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। जांच टीम ने कई दिनों तक मंदिर परिसर, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और दान प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।

23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। इसके आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।

किन लोगों को बनाया गया आरोपी?

एफआईआर में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है। सभी किसी न किसी रूप में मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती, दानपात्रों की निगरानी या नकदी प्रबंधन से जुड़े थे।

आरोपी

मंदिर में जिम्मेदारी

आरोप

रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू

दानपात्रों की निगरानी

चढ़ावे में गबन, संपत्ति बनाने का आरोप

लवकुश मिश्रा

कैश काउंटिंग टीम

दान राशि में कथित हेराफेरी

अनुकल्प मिश्रा

गणना कक्ष कर्मचारी

नकदी छिपाकर चोरी करने का आरोप

मनीष यादव

चढ़ावा गिनती

घर से लाखों रुपए बरामद होने का दावा

अविनाश शुक्ला

नकदी गणना

चढ़ावे में गड़बड़ी का आरोप

करुणेश पांडेय

दान राशि प्रबंधन

नकदी चोरी और संपत्ति खरीदने का आरोप

सुभाष श्रीवास्तव

कैश काउंटिंग प्रभारी

निगरानी में लापरवाही और मिलीभगत

रमाशंकर मिश्रा

दानपात्र प्रबंधन

अन्य आरोपियों के साथ कथित साजिश

ट्रस्ट सदस्य ने दर्ज कराई FIR

इस मामले की शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई। वे भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी रह चुके हैं और सितंबर 2025 में ट्रस्ट के सदस्य बनाए गए थे। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज की गई है।

Ayodhya Ram Mandir

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

धारा

आरोप

अधिकतम सजा

BNS 305

सुरक्षित स्थान से चोरी

7 वर्ष तक जेल

BNS 306

कर्मचारी द्वारा चोरी

7 वर्ष तक जेल

BNS 316(5)

आपराधिक विश्वासघात

10 वर्ष या उम्रकैद

BNS 317(4)

चोरी की संपत्ति का लेन-देन

10 वर्ष या उम्रकैद

BNS 317(5)

चोरी की संपत्ति छिपाना

3 वर्ष तक जेल

BNS 61

आपराधिक साजिश

अपराध के अनुसार

BNS 3(5)

सामूहिक अपराध

सभी पर समान जिम्मेदारी

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम

पद का दुरुपयोग

4 से 10 वर्ष तक जेल

FIR में किन बड़े नामों का जिक्र नहीं?

जांच के दौरान यह चर्चा रही कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। हालांकि दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों और विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि जांच केवल कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या वरिष्ठ स्तर की जिम्मेदारी भी तय होगी।

जांच के दायरे में आ सकते हैं सरकारी कर्मचारी

एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। यह अधिनियम सामान्यतः सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अगर जांच में चढ़ावे की रकम बैंक तक पहुंचाने या जमा कराने की प्रक्रिया में किसी सरकारी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

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SIT ने कैसे की जांच?

एसआईटी ने लगभग एक सप्ताह तक लगातार जांच की। इस दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और नकदी गिनने वाली एजेंसी से पूछताछ की गई। बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज, दान रजिस्टर और वित्तीय दस्तावेजों की भी गहन जांच की गई।

SIT जांच की टाइमलाइन

तारीख

क्या हुआ

13 जून

यूपी सरकार ने SIT गठित की

15-20 जून

कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ

17 जून

बैंक रिकॉर्ड और एजेंसी की जांच

20 जून

बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच पूरी

23 जून

सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी

26 जून

FIR के बाद 8 आरोपी गिरफ्तार

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एसआईटी को जमीन सौदों से जुड़े कई दस्तावेज सौंपे हैं और जांच का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि भगवान राम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।

दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एफआईआर दर्ज होने का स्वागत करते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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नृपेंद्र मिश्र को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

जांच के बीच यह भी चर्चा है कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी को यह जिम्मेदारी देने की सिफारिश की है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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