नेशनल डेस्क। पीएम नरेंद्र मोदी ने आज “सबका साथ, सबका विकास-‘जनता की आकांक्षाओं को पूर्ति’ विषय पर आयोजित बजट के बाद चौथे वेबिनार को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों को देश की प्रगति का आधार बताते हुए कहा-इन क्षेत्रों के सशक्त होने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की विकास गति तेज होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बीते कुछ सालों में देशभर के कई जिलों में नए मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिली है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच गांवों तक बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि भारत अब केवल इलाज पर नहीं बल्कि निवारक और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली पर भी जोर दे रहा है। योग और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक भारतीय पद्धतियों को भी दुनिया भर में पहचान मिल रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर केयरगिवर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और इससे भारतीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने विशेषज्ञों से कौशल प्रशिक्षण के नए मॉडल तैयार करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का आग्रह किया है।
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पीएम मोदी ने वेबिनार को आगे संबोधित करते हुए कहा कि- बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुसार भारत की शिक्षा प्रणाली को भी मॉर्डन बनाना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा को उद्योग और से जोड़ने की बात कही। आगे उन्होंने कहा कि-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई), ऑटोमेशन, डिजिटल इकोनॉमी और डिजाइन आधारित मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत को तेजी से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को नवाचार और शोध के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा।
आज खेल को राष्ट्रीय विकास के एक जरूरी चीज के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया जैसी पहल ने देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया है। और खेल अवसंरचना को मजबूत करने में मदद की है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को ध्यान में रखते हुए देश में युवा खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने पर्यटन और संस्कृति को रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार नए पर्यटन स्थलों का विकास न केवल शहरों की पहचान को मजबूत करता है, बल्कि इससे लोकल इकोनॉमी भी मजबूत होती है।