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'न ड्रग, न शराब… अब खून से नशा!'भोपाल में ‘ब्लड किक’ का खतरनाक ट्रेंड उजागर

भोपाल में एक साइलेंट लेकिन खतरनाक ट्रेंड तेजी से फैल रहा है नाम है ब्लड किक। सुनने में अजीब, लेकिन हकीकत इससे भी ज्यादा डरावनी है। कुछ युवा नशे के लिए किसी ड्रग या शराब का नहीं, बल्कि अपने ही खून का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे सिरिंज से खून निकालकर दोबारा शरीर में चढ़ाते हैं, यह सोचकर कि इससे उन्हें तुरंत सुकून, एनर्जी और एक अलग तरह की ‘हाई’ मिलती है।
भोपाल में ‘ब्लड किक’ का खतरनाक ट्रेंड उजागर
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल में एक ऐसा ट्रेंड सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई सन्न है। यहां कुछ युवा किसी बाहरी ड्रग या शराब के नहीं, बल्कि अपने ही खून के नशे में फंसते जा रहे हैं। इस खतरनाक लत को में GenZ भाषा में ‘ब्लड किक’ कहा जा रहा है।

    कुछ सेकंड के अजीब से सुकून और अलग एहसास के लिए युवा अपनी नस से खून निकालकर फिर से शरीर में चढ़ा रहे हैं। सुनने में यह साइंस जैसा लगता है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह एक खतरनाक भ्रम है जो सीधे मौत की तरफ ले जा सकता है।

    डॉक्टरों ने खोला चौंकाने वाला सच

    भोपाल के अस्पतालों में सामने पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई केस सामने आए हैं, जिन्होंने डॉक्टरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मनोरोग विभाग में पहुंचे कुछ युवाओं ने बताया कि वे खुद ही सिरिंज से खून निकालते हैं और फिर उसी खून को शरीर में वापस डालते हैं।
    उनका मानना है कि इससे उन्हें तुरंत एनर्जी मिलती है और एक अलग तरह की ‘किक’ महसूस होती है। लेकिन डॉक्टर साफ कह रहे हैं यह सिर्फ दिमाग का खेल है, शरीर के लिए पूरी तरह खतरनाक।

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    क्या है ‘ब्लड किक’? साइंस नहीं, दिमाग का भ्रम

    विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘ब्लड किक’ कोई इलाज या मेडिकल प्रक्रिया नहीं है। यह एक बिहेवियर एडिक्शन है, जिसमें दिमाग खुद को धोखा देता है। इंसान को लगता है कि वह कुछ खास कर रहा है जिससे उसे फायदा मिल रहा है, लेकिन असल में यह सिर्फ एक मानसिक भ्रम होता है।
    इसमें दर्द और थोड़े समय का सुकून मिलकर एक अजीब सा एहसास देते हैं और यही एहसास धीरे-धीरे लत बन जाता है। सीधे शब्दों में यह खून का नहीं, फीलिंग का नशा है।

    ऐसे शुरू होता है ये खतरनाक ट्रेंड

    आज का डिजिटल दौर जहां हर चीज ट्रेंड बन जाती है। कुछ एक्सट्रीम वीडियो, रील्स या पोस्ट देखकर युवा ‘कुछ अलग करने’ की चाह में इसे ट्राय करते हैं। शुरुआत जिज्ञासा से होती है चलो एक बार करके देखते हैं। लेकिन यही एक बार धीरे-धीरे आदत में बदल जाता है और फिर एक वक्त आता है जब इंसान उस अंधेरे में फंस जाता है, जहां से निकलना आसान नहीं होता।

    कुछ पल की किक, जिंदगी भर का खतरा

    डॉक्टरों के अनुसार, ‘ब्लड किक’ के नुकसान बेहद खतरनाक हैं-

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    • गंभीर इंफेक्शन और सेप्सिस
    • HIV और हेपेटाइटिस का खतरा
    • नसों को स्थायी नुकसान
    • खून के थक्के (ब्लड क्लॉट)
    • एनीमिया और कमजोरी
    • ऑर्गन फेल्योर तक का रिस्क
    • अचानक मौत

    बार-बार खून निकालने और डालने से शरीर का नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है। बोन मैरो पर दबाव पड़ता है और शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। कई मामलों में यह लत अचानक मौत की वजह भी बन सकती है।

    यह नशा नहीं, मानसिक परेशानी का संकेत है

    डॉक्टर मानते हैं कि ‘ब्लड किक’ सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि एक गहरी मानसिक समस्या का संकेत है। इसके पीछे डिप्रेशन, सेल्फ-हार्म की प्रवृत्ति, ध्यान खींचने की चाह (attention seeking) और खुद को दर्द देकर सुकून ढूंढना जैसे कई कारण हो सकते है। यह सामान्य नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि इंसान को मदद की जरूरत है।

    इलाज सुई में नहीं, सपोर्ट में है

    सबसे जरूरी बात इसका इलाज किसी इंजेक्शन या दवा में नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, इससे बाहर निकलने का रास्ता काउंसलिंग और थेरेपी, परिवार का सपोर्ट, सही गाइडेंस और समझ है। ‘ब्लड किक’ सुनने में नया और अलग लग सकता है, लेकिन असल में यह एक खतरनाक ट्रेंड है जो युवाओं को अंदर से तोड़ रहा है।

    अगर आसपास कोई ऐसा कर रहा है इसे नजरअंदाज मत करो। बात करो, समझाओ और जरूरत पड़े तो डॉक्टरों से मदद लें।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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