Aakash Waghmare
19 Jan 2026
पटना। बिहार के बहुचर्चित गैंगस्टर चंदन मिश्रा हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार सुबह भोजपुर जिले के आरा में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने मुठभेड़ के दौरान दो अपराधियों को गोली मारकर घायल कर दिया। ये दोनों आरोपी चंदन मिश्रा की हत्या में शामिल बताए जा रहे हैं। एक अन्य आरोपी को भी मौके से गिरफ्तार किया गया है।
सुबह करीब 5 बजे STF को गुप्त सूचना मिली कि चंदन मिश्रा मर्डर केस से जुड़े अपराधी बिहियां थाना क्षेत्र में देखे गए हैं। सूचना के आधार पर कटिया रोड के पास छापा मारा गया, जहां पुलिस ने संदिग्धों को सरेंडर करने को कहा। लेकिन बदले में अपराधियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश बलवंत सिंह और रवि रंजन सिंह को गोली लगी, जिन्हें आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीसरे आरोपी अभिषेक कुमार को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया।
मुठभेड़ के बाद की तलाशी में पुलिस को मिली चीजें-
इन हथियारों के जरिए ही पटना के पारस हॉस्पिटल में चंदन मिश्रा की हत्या को अंजाम दिया गया था।
बलवंत कुमार सिंह – बक्सर जिले के चक्की थाना क्षेत्र के लिलाधरपुर गांव का निवासी है।
रवि रंजन सिंह – भोजपुर जिले के बिहियां थाना क्षेत्र के चकड़ही गांव का निवासी है।
अभिषेक कुमार – बक्सर के परसिया गांव का निवासी है।
बलवंत के हाथ-पैर में गोली लगी है, वहीं रवि रंजन की जांघ में गोली लगी है। इलाज के दौरान दोनों ने चंदन मिश्रा की हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार की है।
17 जुलाई को पटना के पारस अस्पताल में इलाज के दौरान भर्ती कुख्यात गैंगस्टर चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 5 शूटरों की टीम सीधे अस्पताल के कमरे में घुसी और उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। चंदन की मौके पर ही मौत हो गई।
इस वारदात के बाद बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। शुरुआती जांच में हत्या के पीछे शेरू गैंग का नाम सामने आया।
भोजपुर के एसपी राज ने बताया, “फरार अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। जल्द ही पूरे गैंग का भंडाफोड़ कर दिया जाएगा।”
बिहार में दिनदहाड़े अस्पताल के भीतर गोलीकांड ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वह एक-एक कर पूरे गैंग को सलाखों के पीछे पहुंचा रही है।
कोलकाता में पकड़े गए आरोपियों की मोबाइल कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट, और सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन लोगों ने आरोपियों को पनाह दी और उनके आवागमन में मदद की।