भूपेश बघेल ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए और कांग्रेस की भूमिका को प्रमुख बताया। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की तैयारी के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर दी है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में जगह नहीं दी। उन्होंने तंज कसते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सलाह दी कि अगर महिलाओं के सम्मान की इतनी चिंता है तो अपनी पत्नी कौशल्या साय को मुख्यमंत्री बना दें। बघेल ने कहा कि भाजपा सिर्फ दिखावे की राजनीति कर रही है और महिला सशक्तिकरण के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जन आक्रोश रैली के जरिए झूठ फैलाया जा रहा है और असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। बता दें कि महिला आरक्षण बिल गिरने के विरोध में बीजेपी देशभर में जन आक्रोश रैली निकाल रही है, और कांग्रेस के खिलाफ पैदल मार्च निकाले जा रहे हैं, इसके साथ बीजेपी कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकार छीनने के आरोप लगा रही है।
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भूपेश बघेल ने कहा कि महिला आरक्षण की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी, लेकिन उस समय भाजपा ने इसका विरोध किया था। उन्होंने पंचायत राज व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि जब इसे लागू किया गया तो बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका में उभरीं। बघेल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में रही है और उसने जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया है, जबकि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाती रही है।
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महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं और राज्य सरकार एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संकेत दिए हैं कि इस सत्र में विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसके साथ ही भाजपा ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसमें महिला सम्मेलन और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। 20 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 27 अप्रैल तक चलेगा और इसके जरिए कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।