92 करोड़ फर्जी बिल घोटाले में ईडी का शिकंजा: जांच में सामने तत्कालीन सहायक यंत्री मुख्य साजिशकर्ता

नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में ईडी ने अभय राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा की गिरफ्तारी की पुष्टि की। 119 करोड़ के फर्जी बिलों के जरिए 86 करोड़ से अधिक की निकासी का आरोप, अब जांच एजेंसी अवैध कमाई के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
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 जांच में सामने तत्कालीन सहायक यंत्री मुख्य साजिशकर्ता
फाइल फोटो

इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल महाघोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ईडी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच नगर निगम में ऐसे विकास कार्यों के नाम पर 119.53 करोड़ रुपए के फर्जी और बोगस बिल प्रस्तुत किए गए, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था। जांच एजेंसी के अनुसार इन जाली दस्तावेजों और फर्जी कार्यादेशों के आधार पर नगर निगम के खजाने से 86 करोड़ रुपए से अधिक की राशि धोखाधड़ीपूर्वक निकाल ली गई। मामले में अब तक की जांच में 92.76 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण सामने आए हैं।

तीन दिन की रिमांड खत्म, आज फिर कोर्ट में पेशी

ईडी ने 1 जून को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया था, जहां से तीन दिन की रिमांड मिली थी। इस दौरान अधिकारियों ने आरोपियों से घंटों तक पूछताछ की और घोटाले की पूरी साजिश, लाभार्थियों तथा रकम के वितरण से जुड़े सवाल पूछे। आज रिमांड अवधि समाप्त होने पर तीनों आरोपियों को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। संभावना है कि ईडी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है।

अभय राठौर को माना गया मुख्य साजिशकर्ता

ईडी की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन सहायक यंत्री अभय राठौर ने फर्जी कार्यादेश तैयार करवाने और उन्हें स्वीकृति की प्रक्रिया में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी ने उसे इस पूरे घोटाले का प्रमुख मास्टरमाइंड और मुख्य षड्यंत्रकारी माना है। वहीं ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी फर्मों के माध्यम से फर्जी बिलों के आधार पर नगर निगम से लगभग 71.78 करोड़ रुपए प्राप्त किए और बाद में इस रकम को विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

22 करोड़ नकद और 34 करोड़ की संपत्तियां जब्त

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ईडी ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर करीब 22 करोड़ रुपए नकद बरामद किए थे। इसके अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित 34 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 43 अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया जा चुका है। इन संपत्तियों में कृषि भूमि, मकान, प्लॉट और अन्य निवेश शामिल हैं, जिन्हें कथित रूप से घोटाले की रकम से खरीदा गया था।

अब मनी ट्रेल पर फोकस

ईडी का सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि नगर निगम से निकाली गई करोड़ों रुपए की राशि आखिर कहां गई। जांच एजेंसी मनी ट्रेल के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि घोटाले से अर्जित धन किन-किन व्यक्तियों, फर्मों और खातों तक पहुंचा। इसके लिए बैंक खातों, संपत्ति खरीद, निवेश और वित्तीय लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा भी जांच एजेंसी को बड़ी मात्रा में दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए हैं।

एक साल पहले सामने आया था घोटाला

यह मामला करीब एक वर्ष पहले उजागर हुआ था, जब नगर निगम आयुक्त की ओर से एमजी रोड थाने में प्रारंभिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच में कई ठेकेदार, निगम अधिकारी-कर्मचारी और ऑडिट से जुड़े लोग जांच के दायरे में आए। कई आरोपी गिरफ्तार होकर जेल भी पहुंच चुके हैं।हालांकि अब तक की जांच में किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी की प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। जांच एजेंसियां लगातार इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या घोटाले का दायरा केवल कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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