Peoples Update Special :भोपाल मेट्रो का निर्माण बना लोगों की परेशानी, 21 किमी कॉरिडोर पर जाम; लोगों ने लगाए बैनर ‘हमें नहीं चाहिए मेट्रो स्टेशन’

प्रवीण श्रीवास्तव,शाहिद खान भोपाल। ऑरेंज लाइन पर करोंद से सुभाष नगर और ब्लू लाइन पर रत्नागिरी तिराहा से भदभदा तक करीब 21 किलोमीटर के निर्माणाधीन कॉरिडोर का ग्राउंड निरीक्षण किया गया। कई स्थानों पर सड़कें 60 फीट से घटकर 10 फीट तक रह गई हैं। बैरिकेडिंग, उखड़ी सड़कें, गड्ढे, धूल और बारिश के बाद जलभराव ने लोगों का सफर मुश्किल बना दिया है। बैरसिया रोड के लोगों ने तो दुकानों और घरों पर 'मेट्रो स्टेशन नहीं चाहिए' तक के बैनर लगा दिए हैं।
21 किलोमीटर के कॉरिडोर में बढ़ीं लोगों की परेशानियां
राजधानी का सबसे महत्वाकांक्षी मेट्रो प्रोजेक्ट शहर को भविष्य की रफ्तार देने के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में इसी परियोजना ने भोपाल की रफ्तार थाम दी है। ऑरेंज लाइन पर करोंद से सुभाष नगर और ब्लू लाइन पर रत्नागिरी तिराहा से भदभदा तक करीब 21 किलोमीटर के निर्माणाधीन कॉरिडोर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि जहां मेट्रो के पिलर खड़े हैं, वहां सड़कें सिकुड़ गई हैं। कहीं 60 फीट चौड़ी सड़क 10 फीट में सिमट गई है, तो कहीं बैरिकेडिंग के कारण एक लेन पूरी तरह बंद है। उखड़ी सड़कें, गहरे गड्ढे, बिखरी गिट्टी, धूल और बारिश के बाद जलभराव ने लोगों का सफर मुश्किल बना दिया है।

ऑरेंज लाइन पर नबीबाग से करोंद तक रेंगते रहे वाहन
ग्राउंड रिपोर्ट के पहले दिन ऑरेंज लाइन के करोंद से सुभाष नगर कॉरिडोर का निरीक्षण किया गया। शाम 4 बजे नबीबाग से करोंद चौराहे तक महज 400 मीटर का सफर तय करने में 12 मिनट लगे। ऑफिस टाइम शुरू होने से पहले ही बैरसिया रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ चुका था। मेट्रो बैरिकेडिंग ने सड़क की चौड़ाई कम कर दी थी, जिससे भारी वाहन और दोपहिया एक ही लेन से गुजरते दिखाई दिए। वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ रहे थे।
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करोंद से काजीकैंप तक सबसे ज्यादा परेशानी
करोंद पुलिया से निशातपुरा आरओबी तक सड़क बदहाल मिली। बैरिकेडिंग ने 40 फीट चौड़ी सड़क को महज 10 फीट में समेट दिया। आरिफ नगर मस्जिद से डीआईजी बंगला तक सड़क लगभग गायब नजर आई। थिंक गैस पंप के सामने ऊबड़-खाबड़ सड़क और बीचों बीच बिजली के खंभे हादसों को दावत देते दिखाई दिए। डीआईजी बंगला से काजीकैंप तक बैरिकेडिंग और जलभराव के कारण लंबा जाम लगा मिला। काजीकैंप से सिंधी कॉलोनी तक महज 600 मीटर की दूरी तय करने में 25 मिनट लग गए। जहां सामान्य दिनों में 3 किलोमीटर का सफर 10 से 15 मिनट में पूरा हो जाता है, वहीं इस दिन 55 मिनट का समय लगा।
ब्लू लाइन पर डायवर्जन ने बढ़ाई दूरी
दूसरे दिन ब्लू लाइन के रत्नागिरी तिराहा से भदभदा तक 12.88 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर का निरीक्षण किया गया। रत्नागिरी तिराहा से पिपलानी तक सड़क अपेक्षाकृत बेहतर मिली, लेकिन पिपलानी से जेके रोड के बीच एक तरफ की सड़क बंद होने से लोगों को भेल टाउनशिप के अंदर से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे रोजाना तीन से चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य के चलते ट्रैफिक का दबाव साफ दिखाई दिया।
आईटीआई, पुल बोगदा और रोशनपुरा में जाम
जेके रोड से बिजली कॉलोनी के बीच आईटीआई के सामने महज 100 मीटर के हिस्से में लंबा जाम मिला, जहां 600 मीटर का सफर तय करने में 15 मिनट लग गए। गोविंदपुरा, प्रभात चौराहा, पुल बोगदा और जहांगीराबाद तक निर्माण सामग्री, बैरिकेडिंग और संकरी सड़कें लोगों की परेशानी का कारण बनी रहीं। रोशनपुरा से डिपो चौराहा और भदभदा की ओर जाने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा भी बैरिकेडिंग से घिरा मिला, जिससे कार, बस और ट्रक एक साथ गुजरने में दिक्कत होती रही।
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लोगों ने लगाए 'मेट्रो स्टेशन नहीं चाहिए' के बैनर
मेट्रो निर्माण से बढ़ रही परेशानियों के कारण बैरसिया रोड क्षेत्र के लोगों में नाराजगी भी दिखाई दी। स्थानीय लोगों ने दुकानों और घरों पर 'मेट्रो स्टेशन नहीं चाहिए' जैसे बैनर तक लगा दिए हैं। लोगों का कहना है कि लगातार जाम, धूल, गड्ढों और जलभराव से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। इसका असर कारोबार पर भी पड़ रहा है और लोगों का काफी समय ट्रैफिक में ही बीत रहा है।

भविष्य की रफ्तार के लिए वर्तमान की बड़ी चुनौती
मेट्रो परियोजना के पूरा होने के बाद राजधानी को आधुनिक परिवहन व्यवस्था मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल निर्माण कार्य लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऑरेंज और ब्लू लाइन के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग, संकरी सड़कें, डायवर्जन और खराब मार्ग के कारण रोजाना हजारों वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्राउंड रिपोर्ट साफ बताती है कि जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, तब तक लोगों को धैर्य के साथ इन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।












