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Peoples Update Special :भोपाल में मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर लोगों की बढ़ी मुसीबतें, कमर, पीठ, गर्दन और कंधे के दर्द के मरीज तेजी से बढ़ें

शहर के मेट्रो कॉरिडोर वाले क्षेत्रों में सुबह और शाम जाम आम बात हो गई है। वाहन चालक लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, जबकि खराब सड़क पर लगातार लगने वाले झटके रीढ़ और गर्दन पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर समस्या पुरानी हो सकती है।
भोपाल में मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर लोगों की बढ़ी मुसीबतें, कमर, पीठ, गर्दन और कंधे के दर्द के मरीज तेजी से बढ़ें

भोपाल में मेट्रो निर्माण के साथ विकास की तस्वीर तो बदल रही है, लेकिन इसकी कीमत रोजाना हजारों लोग अपनी सेहत से चुका रहे हैं। कई मार्गों पर सड़कें संकरी हो गई हैं, गड्ढे और डायवर्जन से 10 मिनट में पूरा होने वाला सफर अब 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का हो गया है। लंबे समय तक जाम में फंसे रहने और उबड़-खाबड़ रास्तों पर लगातार झटके खाने से कमर, पीठ, गर्दन और कंधे के दर्द के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे मरीजों में बढ़ोतरी हुई है।

सांस लेने में तकलीफ, खांसी की शिकायतें बढ़ीं

मेट्रो कॉरिडोर के आसपास रहने वाले रहवासियों और रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों में सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। शहर के मेट्रो कॉरिडोर वाले क्षेत्रों में सुबह और शाम जाम आम बात हो गई है। वाहन चालक लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, जबकि खराब सड़क पर लगातार लगने वाले झटके रीढ़ और गर्दन पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर समस्या पुरानी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना

डॉ. अमित वर्मा, वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ, डॉ आशीष गोहिया, अस्थि रोग विशेषज्ञ  ने बताया कि लगातार खराब सड़क पर वाहन चलाने से रीढ़ की हड्डी पर बार-बार दबाव पड़ता है। इससे कमर दर्द, सर्वाइकल पेन, कंधे में जकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक जाम में बैठे रहने से शरीर की प्राकृतिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे दर्द और अकड़न अधिक महसूस होती है। दोपहिया वाहन चलाने वालों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

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लगातार बढ़ रहे मरीज 

वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ समय में धूल और प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं वाले मरीज बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य से निकलने वाले सूक्ष्म धूल कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं। इससे अस्थमा, एलर्जिक ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी के मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से फेफड़ों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने सलाह दी कि निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव किया जाए व लोगों को मास्क का उपयोग करना चाहिए।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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