इंटरनेशनल बुक डे:2.3 लाख किताबों के साथ भोपाल बना नॉलेज का पावर हाउस

शाहिद खान, भोपाल। झीलों का शहर भोपाल अब तेजी से ‘किताबों के शहर’ के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इंटरनेशनल बुक डे के मौके पर शहर की लाइब्रेरियों की तस्वीर यह बताती है कि डिजिटल दौर में भी किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है बल्कि पढ़ने की संस्कृति नए रूप में आगे बढ़ रही है। शहर की प्रमुख लाइब्रेरियों जैसे इकबाल लाइब्रेरी, मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी और नगर निगम की लाइब्रेरियों को मिलाकर यहां 2.3 लाख से ज्यादा किताबों का विशाल संग्रह मौजूद है। यही वजह है कि भोपाल अब प्रदेश के बड़े रीडिंग हब के रूप में उभर रहा है।

हर सीट फुल, 2000 से ज्यादा युवा कर रहे तैयारी
शहर की लाइब्रेरियों में सुबह से ही छात्रों की भीड़ देखने को मिलती है। नगर निगम द्वारा संचालित पुस्तकालयों और 34 वाचनालयों में लगभग हर सीट भरी रहती है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक यहां पढ़ाई का सिलसिला जारी रहता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। करीब 2000 युवा रोजाना लाइब्रेरियों में पढ़ाई करते नजर आते हैं।
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कम खर्च में बेहतर सुविधा
नगर निगम की लाइब्रेरियां छात्रों के लिए किफायती विकल्प बन चुकी हैं।
- सालाना सदस्यता: ₹1000
- इसमें ₹400 रिफंडेबल डिपॉजिट
- वाई-फाई और कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध
यहां छात्र ऑनलाइन सामग्री के साथ-साथ किताबों का भी पूरा फायदा उठा रहे हैं।

किताबों का विशाल भंडार
शहर की लाइब्रेरियों में किताबों का शानदार कलेक्शन मौजूद है:
- नगर निगम लाइब्रेरियां: 26,440 किताबें
- मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी: 60,000+ किताबें और पांडुलिपियां
- इकबाल लाइब्रेरी: 1.5 लाख+ किताबें
- विवेकानंद लाइब्रेरी: 1,000-1,500 किताबें
इस संग्रह में प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर साहित्य, इतिहास और व्यक्तित्व विकास तक की किताबें शामिल हैं।
20 हजार से ज्यादा दुर्लभ किताबें
विशेषज्ञों के अनुसार शहर की लाइब्रेरियों में 20 हजार से ज्यादा दुर्लभ और ऐतिहासिक किताबें मौजूद हैं। इनमें प्राचीन पांडुलिपियां, रेफरेंस बुक्स और सैकड़ों साल पुराने ग्रंथ शामिल हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी धरोहर हैं।
पाठकों का अनुभव
छात्रों का कहना है कि लाइब्रेरियों ने उनकी पढ़ाई को आसान और बेहतर बनाया है।
- रोहित वर्मा (अभ्यर्थी): अब सभी विषयों की किताबें एक ही जगह मिल जाती हैं समय और पैसे दोनों बचते हैं।
- नेहा खान (बैंकिंग अभ्यर्थी): ऑनलाइन से ज्यादा भरोसेमंद और क्लियर कंटेंट किताबों में मिलता है।
- आदित्य तिवारी (UPSC अभ्यर्थी): रेफरेंस और दुर्लभ किताबों से तैयारी का स्तर बेहतर हुआ है।
- सोनाली मिश्रा (छात्रा): लाइब्रेरियां सिर्फ पढ़ाई नहीं सोच भी बदलती हैं
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डिजिटल दौर में भी किताबों की चमक बरकरार
भोपाल की लाइब्रेरियां यह साबित कर रही हैं कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते दौर में भी किताबों की अहमियत कम नहीं हुई है। यहां न सिर्फ पढ़ाई होती है बल्कि ज्ञान, सोच और व्यक्तित्व का भी विकास होता है। इंटरनेशनल बुक डे पर यह साफ नजर आता है कि भोपाल अब सिर्फ झीलों का शहर नहीं, बल्कि ज्ञान का बड़ा केंद्र बन चुका है।





















